Monday, March 16, 2020

अच्छी प्रतिरक्षा के लिए मजबूत एंटी-बायोटिक पानी / Strong Anti-biotic Water for good immunity

Strong Anti-biotic Water for good immunity

3-4 cups water
10 gloves
cinnamon
Tej Patta 
Black Pepper
Ginger minced
Garlic whole (5 - 6 piececs from one garlic)
Turmeric 

Put above all in water and give it good 3-4 boil. Drink it whole day in small quantity. After soon body will feel healthy and energetic.  


अच्छी प्रतिरक्षा के लिए मजबूत एंटी-बायोटिक पानी

3-4 कप पानी
10 लौंग
दालचीनी
तेज पत्ता
काली मिर्च
अदरक, महीन पिसा हुआ
लहसुन पूरे (एक लहसुन से 5 - 6 टुकड़े)
हल्दी

पानी में सभी सामग्री डालें और इसे 3-4 उबालें। इसे कम मात्रा में पूरे दिन पिएं। जल्द ही शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करेगा।

Sunday, March 15, 2020

सुक्ष्म अग्नि हवन / Subtle fire


Perform Havan / Subtle fire at home. 

Materials required for:

Large Copper Plate
Medium size clay pot
Incense / Havan packet
Cow dung cake 
Any dry mix of your choice




Place a medium flat clay pot in a large copper plate. Add the Indian Havan material. Add Ghee. Mix the ingredients with a spoon. Add wick dipped in ghee. Your Havan recipe is ready. Ignite the fire. Raise ॐ. Read Gayatri Mantra. Keep mixing with spoon, So that there is proper flow of oxygen.

You can do havan /  subtle fire fire in cold and hot places in any corner of the earth. This will help you in respiratory diseases. Its heat will give you instant warmth. The lungs will benefit.

ॐ tat sat |

घर पर सुक्ष्म अग्नि  हवन कैसे करे |  इसके लिए आवश्यक सामग्री :

कॉपर तश्तरी
मिटटी का बड़ा दिया
हवन सामग्री का पैकेट
कोई दूसरा सुखी सामग्री
गोबर उपला

कॉपर की बड़ी तश्तरी में बड़ा दिया रखें |  उसमें आवश्यकता अनुसार हवन सामग्री डालें |  घी डालें |  चम्मच से सामग्री को मिलाएं |  घी में डूबी हुई बाती डालें |  आपकी हवन विधि तैयार है |  अग्नि को प्रज्ज्वलित करें |  ॐ का ऊच्चारण करें |  गायत्री मन्त्र  पढ़े |  चम्मच से सामग्री मिलाते रहे, ताकि ऑक्सीजन का समुचित प्रवाह हो |

यह सूक्षम अग्नि हवन आप धरती के किसी भी कोने में ठन्डे और गर्म स्थानों पर कर सकतें हैं | इससे आपको स्वसन सम्बन्धी रोगों में सहायता मिलेगी | इसकी उष्मा से आपको तुरंत गर्माहट मिलेगी |  फेफड़ो  को लाभ होगा |

ॐ तत सत ||

V2 - Complete Change / पूर्ण परिवर्तन






V2 - Complete Change each day and every day

Today I will discuss V2 idea / philosophy. This philosophy is root of new of you every day, every hour, every second and every nano seconds. Today to stay competetive we all strive to do better than before whether in health, our behavior , our society, our country, or our universe. 

V2 is mainly version 2 or version next of you. Everyday one should be work on V2 / version 2 or version next of oneself. 

For example - Student is preparing for exam, now how he / she can be V2 student, and get better score, get better on subject learning technique. A person, how can be better at health of his / her own or his / her family, and every moment person can next version of it. 
An industrialist other than current production, how one can bring next phase of production so their product will be more valuable to the society and nation. A nation which wants to better in export, then V2 concept will get Nation to next level of export. 

So overall V2, version next is great philosophy that can add value to any dimension of any entity.


V2 - पूर्ण परिवर्तन हर दिन हर दम


आज मैं V2 विचार / दर्शन पर चर्चा करूंगा। यह दर्शन हर दिन, हर घंटे, हर दूसरे और हर नैनो सेकंड में आपको नया बनाता है। आज प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए हम सभी स्वास्थ्य, हमारे व्यवहार, हमारे समाज, हमारे देश या हमारे ब्रह्मांड की तुलना में पहले से बेहतर करने का प्रयास करते हैं।

V2 मुख्य रूप से आपका संस्करण 2 या नया संस्करण है। और हर रोज़ प्रत्येक को V2 / संस्करण 2 या स्वयं के आगे वाले संस्करण पर काम करना चाहिए।

उदाहरण के लिए - छात्र परीक्षा की तैयारी कर रहा है, अब वह कैसे / वह V2 छात्र हो सकता है, और बेहतर अंक प्राप्त कर सकता है, विषय सीखने की तकनीक पर बेहतर हो सकता है। एक व्यक्ति, अपने स्वयं के या अपने परिवार के स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बना सकता है, और हर पल व्यक्ति इसके अगले भाग में हो सकता है। वर्तमान उत्पादन के अलावा एक फैक्टरी उत्पादन के अगले चरण को कैसे ला सकता है ताकि उत्पाद समाज और राष्ट्र के लिए अधिक मूल्यवान हो। एक राष्ट्र जो निर्यात में बेहतर करना चाहता है, तो V2 अवधारणा, निर्यात के अगले स्तर तक राष्ट्र को ले जायेगा।

वस्तुत: V2, अगला संस्करण महान दर्शन है जो किसी भी इकाई के किसी भी आयाम में मूल्य वृद्धि करता है।

Tuesday, January 14, 2020


How to connect GOLANG to postgresSQL#GOLANG, #postgres, #postgresSQL, #Code, #program


Team: Today we will learn how to connect GOLANG with postgresSQL, 
Prerequisites: you will require GOLANG, postgresSQL and Visual Studio Code.

in Visual Studio Code, create root workspace 

c:\project\postgresSQL

Create 3 sub folders 

  • bin
  • pkg
  • src

GoLANG folders

Start Terminial -> CTRL + `

Check golang environment variable -> go env 

set GOBIN and GOPATH 

export GOBIN=/c/project/postgres/bin
export GOPATH=/c/project/postgres

change folder to src and get postgresSQL driver




now src folder should have github package and we are all set to write golang / postgresSQL progam 

package main

import (
    "database/sql"
    "fmt"
    "log"

    _ "github.com/lib/pq"
)

type product struct {
    ProductID   int64
    ProductName string
    ProductDesc string
}

func main() {

    connStr := "user=postgres dbname=inventory password=1234 host=localhost port=5432 sslmode=disable"
    dberr := sql.Open("postgres", connStr)
    if err != nil {
        log.Fatal(err)
    }
    defer db.Close()
    fmt.Println("connection success")

    rowserr := db.Query("SELECT * from public.\"products\" order by \"ProductID\"")
    if err != nil {
        log.Fatal(err)
    }
    defer rows.Close()

    for rows.Next() {
        var prodID string
        var prodName string
        var prodDesc string
        err := rows.Scan(&prodID, &prodName, &prodDesc)
        if err != nil {
            log.Fatal(err)
        }
        fmt.Printf("%s .. %s .. %s\n", prodID, prodName, prodDesc)
    }
}

compile and install code 

go build prod.go
go install prod.go

install creates prod.exe in bin folder

start command prompt
go to bin sub folder
run prod.exe










Congratulations!!! you did excellent Job!!!
email me if you have any qusetion!!!

postgres products data in database

postgres output


Friday, May 1, 2015

अमृता डेयरी फार्म्स

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive


फ़ार्म में अपनी गायों के साथ संतोष डी सिंह

यह कहानी संतोष डी सिंह की है जिन्होंने आईटी करियर छोड़कर डेयरी फ़ार्म उद्योग खड़ा किया, आज उनके उद्यम का कुल टर्नओवर 1 करोड़ रुपए सालाना है।
कंपनी : अमृता डेयरी फार्म्स
संस्थापक : संतोष डी सिंह
क्या खास : आईटी सेक्टर प्रोफेशनल द्वारा कम संसाधनों के साथ शुरू किया गया उद्यम जो समय के साथ कामयाब बिजनेस की शक्ल ले चुका है।

बेंगलुरु से तकनीकी शिक्षा में पोस्ट ग्रैजुएशन की डिग्री लेने के बाद संतोष डी सिंह को इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में एक अच्छी नौकरी मिल गई। डेल और अमेरिका ऑनलाइन जैसे आईटी सेक्टर के मल्टीनेशनल दिग्गजों के साथ करीब 10 साल तक संतोष ने काम किया। इन 10 सालों के अपने अनुभव को साझा करते हुए संतोष बताते हैं कि ‘उन दिनों भारत में आईटी इंडस्ट्री फल-फूल रही थी। मुझे अपने काम के दौरान दुनिया के कई देशों का सफर करने का मौका मिला। देश-विदेश की यात्रा के बीच मुझे ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले जहां अपने उद्योग के माध्यम से लोग अच्छा कमा रहे थे। यहीं से मुझे एक ऐसा उद्योग शुरू करने की प्रेरणा मिली जिसके जरिए मैं हमेशा प्रकृति के नजदीक रहकर काम कर सकूं। इसी बीच डेयरी फार्मिंग का आइडिया मेरे जेहन में आया।’
संतोष को महसूस हुआ कि भारतीय कृषि की अनिश्चितता को देखते हुए डेयरी फार्मिंग तुलनात्मक रूप से स्थिर और लाभदायक व्यवसाय है। इसी सोच के साथ अपने इस आइडिया को उद्यम में बदलने के लिए संतोष ने अपनी जॉब छोड़ने का फैसला कर लिया। कॉरपोरेट दुनिया की अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़ने से पहले संतोष ने अपने परिवार की सहमति हासिल की और फिर अपने आइडिया को उद्योग की शक्ल देने में जी-जान से जुट गए। इस काम में संतोष को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, प्रोसेस इम्प्रूवमेंट, बिजनेस इंटेलिजेंस, एनालिटिक्स और रिसोर्स मैनेजमेंट के वे सभी गुर काम आए जो उन्होंने अपनी जॉब के दौरान सीखे थे।
ट्रेनिंग से हासिल की बुनियादी जानकारी 
फार्मिंग की कोई पृष्ठभूमि होने के कारण संतोष को इस क्षेत्र का कोई तजुर्बा नहीं था। अनुभवहीनता को दूर करने के लिए उन्होंने डेयरी फार्मिंग की ट्रेनिंग लेने का निर्णय लिया और नेशनल रिसर्च डेयरी इंस्टीट्यूट में फुल टाइम ट्रेनिंग के लिए एडमिशन ले लिया। इस ट्रेनिंग के दौरान संतोष को पशुओं के साथ रहकर उनकी देखभाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिला। इस ट्रेनिंग के बारे में संतोष कहते हैं कि ‘एयर-कंडीशंड वर्कप्लेस की तुलना में डेयरी फार्म के खुले माहौल ने मुझे एनर्जी से भर दिया। खेतों में रहकर ट्रेनिंग पाकर मुझमें यह आत्मविश्वास गया था कि पशुपालन एक आकर्षक पेशा है जिसे मैं लंबे समय तक करना चाहूंगा।’
तीन गायों से हुई शुरुआत 
संतोष ने अपने उद्यम की शुरुआत तीन गायों के साथ अमृता डेयरी फार्म्स के नाम से की। करीब 20 लाख रुपए के इन्वेस्टमेंट के साथ इसकी स्थापना उन्होंने बेंगलुरु से 40 किमी दूर अपने तीन एकड़ के पुश्तैनी खेत में की, जहां नौकरी के दौरान वे वीकेंड बिताने जाते थे। शुरुआत में गायों को नहलाने, दूध निकालने और उनके छप्पर की साफ-सफाई संतोष खुद ही करते थे। धीरे-धीरे संतोष की योजना सफल होने लगी और शुरुआत के पहले ही साल में गायों की संख्या तीन से बढ़कर बीस तक पहुंच गई।
इसी के चलते संतोष ज्यादा गायों के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने के प्रयास करने लगे। इसी दौरान संतोष को ट्रेनिंग देने वाले एनडीआरआई के एक ट्रेनर का उनके फार्म पर आना हुआ। उन्होंने संतोष को टेक्नोलॉजिकल सपोर्ट के लिए नाबार्ड से सहायता लेने की सलाह दी। इस सलाह पर अमल करते हुए संतोष ने प्रयास किए तो उन्हें नाबार्ड से पूरा सहयोग मिला। इससे अपने काम को और विस्तार देने का प्रोत्साहन मिला और उन्होंने गायों की संख्या बढ़ाकर 100 कर दी।

Sunday, April 19, 2015

माइक्रो चिलर

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive

‘एमबीए करने के बाद मैं एक कंपनी में पंजाब का स्टेट हेड बन चुका था। पोस्टिंग लुधियाना में थी। और 15 लाख रुपए का एनुअल पैकेज। कई बड़ी कंपनियों से जॉब के ऑफर भी थे। लेकिन, उन्हें छोड़कर मैंने मिल्क प्रोसेसिंग का कारोबार शुरू किया। और कुछ दिनों बाद ही मैंने एक माइक्रो चिलर बनाया। डेढ़ साल के अंदर ही काम चल निकला और हमारा सालाना कारोबार एक करोड़ से ज्यादा तक जा पहुंचा। पहले मैं खुद के लिए कमाता था, लेकिन आज मेरे साथ 100 सेे ज्यादा छोटे डेयरी फॉर्मर्स जुड़े हैं। मैं खुश हूं कि, मेरी वजह से उन्हें पहले से ज्यादा फायदा मिल रहा है।'यह मेरे लिए सबसे बड़ी बात है।
15 लाख की जॉब छोड़ शुरू किया दूध का कारोबार, बने करोड़पति












मार्केट में उतारूंगा माइक्रो चिलर
एमबीए पास गौतम अग्रवाल ने बताया कि माइक्रो चिलर छोटे डेयरी फॉर्मर्स को ध्यान में रखकर बनाया है। आम तौर पर मार्केट में मिलने वाली चिलिंग मशीनें साइज में बड़ी हैं और उनकी कीमत भी एक लाख से शुरू होती है। हमने जो माइक्रो चिलर बनाया है इसकी कीमत मात्र 25 हजार रुपए के करीब है और यह साइज में भी छोटा। इस वजह से यह आम लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इसकी डिमांड को देखते हुए अब जल्द ही इसे मार्केट में उतारने की सोची है। फिलहाल डेयरी फॉर्मर्स के लिए चिलिंग सेंटर भी खोल रखें हैं।
देशभर के धार्मिक स्थलों में देसी गायों के घी की सप्लाई
मैंने सिर्फ देसी गायों के दूध का कारोबार शुरू किया। साथ ही साथ जुड़े डेयरी फार्मर्स को इन्हें बढ़ावा देने के लिए तकनीकी जानकारियां देनी भी शुरू की। अभी मैं गाय के दूध का रिटेल काराेबार, पनीर और घी का कारोबार कर रहा हूं। हमारे पठानकोट स्थित फार्म से देसी घी देशभर के धार्मिक स्थलों में सप्लाई किया जा रहा है। इसका दायरा और बढ़ाया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि और भी प्रोडक्ट ज्लद मार्केट में जल्द उतारा जाए। अब मैं पनीर, प्री-बायोटिक मिल्क ड्रिंक और मिल्क प्रोडक्ट्स की क्वाॅलिटी में सुधार के लिए शोध में जुटा हूं।

Saturday, April 11, 2015

शक्ति संचय कीजिए


#facebook
#inspiration
#motivation
जीवन एक प्रकार का संग्राम है। इसमें घड़ी-घड़ी मे विपरीत परिस्थितियों से, कठिनाइयों से, लड़ना पड़ता है। मनुष्य को अपरिमित विरोधी-तत्त्वों को पार करते हुए अपनी यात्रा जारी रखनी होती है। दृष्टि उठाकर जिधर भी देखिए, उधर ही शत्रुओं से जीवन घिरा हुआ प्रतीत होगा। ‘दुर्बल, सबलों का आहार है’ यह एक ऐसा कड़वा सत्य है, जिसे लाचार होकर स्वीकार करना ही पड़ता है। छोटी मछली को बड़ी मछली खाती है। बड़े वृक्ष अपना पेट भरने के लिए आस-पास के असंख्य छोटे-छोटे पौधों की खुराक झपट लेते हैं। छोटे कीड़ों को चिड़ियाँ खा जाती हैं और उन चिड़ियों को बाज आदि बड़ी चिड़ियाँ कार कर खाती हैं। गरीब लोग अमीरों द्वारा, दुर्बल बलवानों द्वारा सताए जाते हैं। इन सब बातों पर विचार करते हुए हमें इस निर्णय पर पहुँचना होता है कि यदि सबलों का शिकार बनने से, उनके द्वारा नष्ट किए जाने से, अपने को बचाना है तो अपनी दुर्बलता को हटाकर इतनी शक्ति तो कम से कम अवश्य ही संचय करती चाहिए कि चाहे जो कोई यों ही चट न कर जाए।
सांसारिक जीवन में प्रवेश करते हुए यह बात भली प्रकार समझ लेनी चाहिए और समझ कर गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि केवल जागरूक और बलवान व्यक्ति ही इस दुनिया में आनंदमय जीवन के अधिकारी हैं।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
-अखण्ड ज्योति- अगस्त 1945 पृष्ठ 3
http://literature.awgp.org/maga…/AkhandjyotiHindi/…/August.3

Tuesday, April 7, 2015

गुलाब जल और गुलाब ऑयल

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive

पंजाब में बठिंडा में कलालवाला गांव के किसान राजिंदरपाल सिंह भोला की मेहनत रंग लाने लगी है। 2004 में उन्होंने 4 रुपए की गुलाब की कलम और देग (मिट्टी का बड़ा बर्तन) के सहारे काम स्टार्ट किया और आज हर साल 6 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। इसको लेकर युवा किसान भोला को स्टेट अवॉर्ड भी मिल चुका है।
भोला के गुलाब की महक अमेरिका और कनाड़ा तक पहुंचने लगी है। उनके द्वारा लगाई गई मशीन से बने गुलाब के तेल की मांग कई देशों में होने लगी है। इसको लेकर भोला ने बताया कि उन्होंने खेती में रिस्क लेते हुए एक साथ ही छह एकड़ में गुलाब की खेती शुरू कर दी। उस समय इस पर कुल 4 रुपये इन्वेस्टमेंट करनी पड़ी थी।



ऐसे बनाते हैं गुलाब जल और गुलाब ऑयल
भोला के चचेरे भाई युवा किसान रॉबिन भाकर ने बताया कि उन्होंने फैक्ट्री खुद लगा रखी है। पहले गुलाब के फूलों को सुबह-सुबह तोड़ा जाता है। 80 किलोग्राम फूलों को एक बड़ी देग (मिट्टी का बड़ा बर्तन) में डाल कर साफ पानी डाला जाता है। ऊपर से टाइट करके बंद कर दिया जाता है। देग के नीचे हल्की आग जला दी जाती है। इससे पानी वाष्प बन कर भभके में चली जाती है। उस भभके को पानी में रखा जाता है। ऐसे में भाप जब भभके में पहुंचती है, तो वहां का तापमान कम होने से वो भी तरल बन जाती है और वह यह गुलाब जल बन जाती है। जब गुलाब के चार भभके भर जाते हैं, तो उनको एक अन्य बड़ी देग में डाल कर उनको उसी प्रक्रिया से गुजारा जाता है, तो उस के ऊपर गोल्डन कलर का गुलाब ऑयल जाता है। एक क्विंटल गुलाब पर सिर्फ 3 से 5 एमएल ऑयल ही आता है। एक किलोग्राम गुलाब ऑयल की अंतर राष्ट्रीय मार्केट में कीमत 15 लाख के करीब है। उनके गुलाब जल को एक्सपोर्टर खरीद लेते हैं। उनके गुलाब की मांग कनाड़ा और अमेरिका में ज्यादा है। क्योंकि उनका गुलाब आर्गेनिक होता है। वो किसी भी खाद्य रसायन का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

गुलाब के फूलों को तोड़ता भोला

चाचा ने दिया गुलाब की खेती का आइडिया

भोला के चाचा जगदेव सिंह को भ्रमण का काफी शौक था। वो घूमते-घूमते आगरा चले गए, वहां उन्होंने गुलाब की खेती होती देखी। तो इसके बारे में पता किया। देखा कि पंजाब का मौसम भी गुलाब की खेती के अनुकूल है। पंजाब में भी इसकी खेती की जा सकती है। इससे रिवायती खेती से छुटकारा मिलेगा और जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी। उन्होंने गांव आकर भोला को गुलाब की खेती करने के लिए उत्साहित किया।

लोकल में गुलाब जल की बहुत डिमांड है

भोला सिंह ने बताया कि उनके गुलाब जल की लोकल बहुत डिमांड है। उनके द्वारा भाकर आर्गेनिक प्रोडक्ट्स के नाम पर गुलाब जल की पैकिंग करके गुलाब जल सेल किया जाता है और जो भी एक बार इसका इस्तेमाल करता है, वो जिंदगी में और किसी गुलाब जल का इस्तेमाल नहीं कर सकता।

Tuesday, March 10, 2015

नौ में से आठ विषय में था फेल, पाया 12 लाख का पैकेज

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive

इंदौर. शहर के एक स्टूडेंट को दुबई की एक कम्पनी ने 12 लाख का पैकेज ऑफर किया है। आईआईएम को छोड़कर मैनेजमेंट स्टूडेंट्स अमूमन ऐसा पैकेज शुरुआत में तो नहीं पाते। रेनेसां कॉलेज से ग्रेजुएशन और इंदौर इंदिरा से पीजी करने वाले इस स्टूडेंट की सक्सेस से सभी इम्प्रेस्ड हैं। हालांकि इस सक्सेस के बैकग्राउंड में एक ऐसी कहानी है जो इस स्टूडेंट के हमउम्र युवाओं के लिए मिसाल है। सागर कहते हैं मेरी नौ में से आठ सब्जेक्ट्स में एटीकेटी आ गई, गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया, रूममेट्स ने पिटाई कर दी और दोस्त यारों ने बायकॉट कर दिया। मुझे लग रहा था अब सब खत्म... लेकिन दोस्तों! यकीन मानो जहां आप खत्म समझते हैं, वहीं जिंदगी आपको एक नई शुरुआत करने का मौक़ा देती है। इसे पहचान लो और आगे बढ़ जाओ। पढ़िए इस सक्सेस के पीछे की कहानी

नौ में से आठ विषय में था फेल, मेहनत से टॉपर बना और पाया 12 लाख का पैकेज

'23 साल का एक लड़का। नाम है सागर गर्ग। साधारण रहन-सहन, देखने में भी सादा ही। भीड़ में अलग नज़र आने जाने जैसा कुछ नहीं। कोटा से इंदौर आया पढ़ने। पिता बिज़नेसमैन। संयुक्त परिवार में रहते हैं। चचेरे भाइयो में ज्यादातर आईआईटी से पढ़े व लाखों का पैकेज पाने वाले और कभी 60 प्रतिशत मार्क्स से ज्यादा न पानेवाला सागर इंदौर से बी.कॉम ऑनर्स कर रहा था। हालांकि यहां सागर ने ग्रेजुएशन में तीनों साल मेडल्स पाए। शहर में दोस्ती यारी हो गई। अब पीजी भी इंदौर में ही शुरू हुआ। फिर सागर की दोस्ती साथ पढ़नेवाली एक लड़की से हुई। दोनों खास दोस्त बने। सब कुछ यूं ही अपनी गति से चल रहा था, लेकिन फिर कहानी में ट्विस्ट आया। लड़की से अलगाव हो गया। सागर ने उसे बहुत बुरा भला कहा और इस वजह से सभी दोस्तों ने बायकॉट कर दिया। सागर की परफॉर्मेंस खराब होने लगी। सागर ने कॉलेज जाना भी छोड़ दिया। मैनेजमेंट ने डीबार कर दिया। फिर पीजी सेकंड इयर के रिज़ल्ट में नौ में आठ सब्जेक्ट्स में एटीकेटी आ गई। सागर को लगा अब कॅरियर खत्म, लेकिन टीचर्स के सपोर्ट और मोटिवेशन से वह फिर उठा, मेहनत की और एटीकेटी एक्ज़ाम सभी सब्जेक्ट्स में 90 से ऊपर मार्क्स लाकर बैच का टॉपर बना। कैम्पस प्लेसमेंट में भी उसे 12 लाख का पैकेज ऑफर किया गया।'
टीचर्स और पैरेंट्स के प्रेम को परखना सबसे बड़ी भूल 
मैं आज जो कुछ भी हूं अपने टीचर्स और कुछ साथियों के सपोर्ट से हूं। ऐसा नहीं है कि मैंने ग़लतियां नहीं की। अपनी फ्रेंड के साथ जब मेरा झगड़ा हुआ तब मेंने बहुत खराब लैंग्वेज में उससे बात की। हालांकि मैंने उससे माफी भी मांगी। मुझ पर एक और प्रेशर था कि फेल होकर लौट गया तो डैड के मुझे इंदौर भेजने के फैसले पर लोग हंसेंगे। मैं हार गया था, लेकिन मेरे गाइड स्वप्निल कोठारी की हेल्प से मैं इससे उबर पाया। आज मैं अर्बन गुमटी की मार्केटिंग टीम में हूं। हाथ में एक अच्छी जॉब है। इससे यह निचोड़ निकाल पाया कि गुरु और माता पिता के आपके प्रति प्रेम और समर्पण पर शक मत करो। उसे परखो मत।


Wednesday, February 25, 2015

पल्लव नढ़ानी - फ्यूजन चार्ट्स टेक्नोलॉजिज

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive


फाइल फोटो : पल्लव नढ़ानी

कंपनी : फ्यूजन चार्ट्स टेक्नोलॉजिज
संस्थापक : पल्लव नढ़ानी
क्या खास : इंटरेक्टिव फ्लैश चार्ट्स और डेटा विजुअलाइजेशन टूल बनाने वाली कंपनी जिसके क्लाइंट्स में लिंक्डइन, गूगल, फेसबुक, फोर्ड जैसे नाम शामिल हैं।
भागलपुर के मारवाड़ी परिवार में जन्मे पल्लव के घर में लग्जरी के नाम पर एक कम्प्यूटर था जिसपर वह घंटों बिताया करता था। कम्प्यूटर उसके पिताजी का था जिसे वे अपने अकाउंट्स के काम के लिए इस्तेमाल करते थे। 1997 में पल्लव के पिता ने एक कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की तो उनके रिश्तेदारों के बच्चे ट्रेनिंग के लिए उनके पास आए। वे अपने साथ कुछ किताबें भी लेकर आए थे। रात में सभी के सो जाने के बाद पल्लव ने इन किताबों को पढ़कर खुद सीखना शुरू किया। फिर पल्लव पिता के साथ कोलकाता शिफ्ट हो गया। यहां उसे ला मार्टिनेयर ब्वॉयज स्कूल में दाखिला मिल गया जहां शहर के बेहतरीन स्टूडेंट्स पढ़ने आते थे। पल्लव भी इन्हीं की तरह बनने के लिए प्रेरित हुआ और उसने कड़ी मेहनत करने की ठान ली।
साधारण लड़के की असाधारण महत्वाकांक्षाएं
हाई स्कूल स्टूडेंट पल्लव नढ़ानी को अपने स्कूल असाइनमेंट्स के लिए एक्सेल में चार्ट्स बनाना जरा भी पसंद नहीं था। पल्लव के अनुसार, स्कूल असाइनमेंट्स के दौरान एक्सेल का कई बार इस्तेमाल करना पड़ता था और बोरिंग चार्ट्स उसे बिल्कुल पसंद नहीं थे। इसी नापसंद ने उसके दिमाग में एक इंटरेक्टिव चार्टिंग सॉल्यूशन तैयार करने के आइडिया को जन्म दिया। पल्लव ने एक वेबसाइट पर अपने इस विचार को लेकर कुछ लेख लिखे। इसकी शुरुआत जेब खर्च हासिल करने के मकसद से हुई थी। इन लेखों के लिए उसे काफी सराहना मिली और करीब 1,23,979 रुपए (2000 डॉलर) का मेहनताना भी। 11वीं कक्षा के स्टूडेंट के लिए 1,23,979 रुपए का मेहनताना कुछ कम नहीं था। इससे 16 वर्ष के इस युवक को बड़ा प्रोत्साहन मिला। उसने अपने विचार को कारोबारी जामा पहनाने का फैसला किया और 2001 में अपनी कंपनी फ्यूजन चार्ट्स टेक्नोलॉजिज की नींव रखी।

कंपनी की शुरुआत के तीन साल तक पल्लव ने अकेले ही प्रॉडक्ट डेवलपमेंट, वेबसाइट निर्माण, डॉक्यूमेंटेशन, सेल्स एंड मार्केटिंग और कस्टमर सपोर्ट के मोर्चे संभाले। इस दौरान उन्होंने सीखा कि ग्लोबल सॉफ्टवेयर कॉम्पोनेंट मार्केट कैसे काम करता है, कैसे अपनी ताकत को बढ़ाकर एक बेहतर गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी बनाई जा सकती है।
जब ऑर्डर मिलने शुरू हुए तो पल्लव ने 2005 में अपना पहला ऑफिस खोला और करीब दो वर्ष के अंतराल में 20 लोगों की एक टीम खड़ी की। अब पल्लव को अनुभवी सलाह की भी जरूरत महसूस होने लगी क्योंकि उन्हें सरकारी नियमों और बैंकिंग व फाइनेंस की ज्यादा जानकारी नहीं थी, वहीं उन्हें विदेशी क्लाइंट्स के साथ भी डील करना पड़ता था। इस परेशानी को हल करने के लिए उन्होंने अपने पिता की मदद ली।

2009 में पल्लव ने कारोबार को विस्तार देने के लिए अपना ऑफिस कोलकाता का आईटी हब कहलाने वाले सॉल्ट लेक में शिफ्ट किया और अपनी टीम के सदस्यों की संख्या 20 से बढ़ाकर 50 की। इससे पल्लव को बिजनेस बढ़ाने में सहायता मिली। 2010 में फ्यूजन चार्ट्स का ऑफिस बेंगलुरु में भी खोला गया। वर्तमान में दो शहरों से संचालित फ्यूजन चार्ट्स में 80 कर्मचारी और 21,000 से ज्यादा क्लाइंट्स हैं जिनमें लिंक्डइन, गूगलफेसबुक, फोर्ड जैसी कंपनियां शामिल हैं।
कंपनी ने धीरे-धीरे अपने पांव पसारे और दुनिया के करीब 118 देशों के फार्मास्यूटिकल्स से लेकर एफएमसीजी तक और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से लेकर नासा तक अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इतना ही नहीं, अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामाद्वारा 2010 में इस प्रोडक्ट को चुना गया जिससे फ्यूजनचार्ट्स को इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पहुंचने में बहुत मदद मिली। महज 30 वर्ष के पल्लव नढ़ानी के बिजनेस ने आज 47 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया है।

Saturday, October 11, 2014

जेपी ग्रुप के फाउंडर जयप्रकाश गौर

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive


घर से निकले 100 रुपए लेकर, अब MP में लगाएंगे 35 हजार करोड़

आज मैं 84 साल का हूं और 40 साल से प्रदेश में काम कर रहा हूं। साल 1950 में मैं रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स कर जेब में 100 रुपए लेकर काम करने निकला था। शुरुआत झांसी से की और फिर 1958 में मैं मुरैना आ गया और अपना कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया। जापान से 55 करोड़ का लोन मिला रेल लाइन बिछाने के लिए। साल 1983 में रीवा आया रेल लाइन का काम करने के लिए। 

घर से निकले 100 रुपए लेकर, अब MP में लगाएंगे 35 हजार करोड़
लोगों ने मुझसे कहा- यह मुश्किल काम है। मैंने जीवन में एक ही चीज सीखी कि कोई काम यदि मुश्किल है और कोई न कह रहा हो तो वह जरूर करना चाहिए। मेरे लिए यह शगुन होता है और इससे पॉजीटिव एनर्जी मिलती है। इराक में 1979 में 250 करोड़ का काम निकला, मेरा टेंडर सबसे नीचा था। ग्रुप की बैलेंस शीट कम थी और बैंक से 20 करोड़ की गारंटी लेना थी। बैंक वालों ने मुझे बुलाया और मेरी हाइट और वजन देखकर तैश से देखा.. जब कोई तैश से देखता है तो मुझे अच्छा लगता है। आखिर मेरा काम हुआ। मुझे नहीं पता था कि मैं दुनिया में इतना जी पाऊंगा और इतना काम कर पाऊंगा। प्रदेश की जमीन काफी पवित्र है और मैं यहां 35 हजार करोड़ रुपए निवेश करूंगा।

Sunday, September 28, 2014

बिजनस बिजनस

प्रस्तुति - नवभारत टाइम्स

# Leader
# Creative


रुटीन लाइफ की नौकरी पर निकलते वक्त हमेशा आपको लगता है कि 'कुछ' अपना करता तो ज्यादा अच्छा होता। किसी आस-पड़ोस वाले या दोस्त को बिजनस के दम पर दशकों की दौड़ बरसों में पूरा करते देखने पर लगता है कि 'कुछ' अपना करता तो अच्छा होता। यह 'कुछ' करने का आइडिया आपको रात-दिन सोने नहीं दे रहा तो अब वक्त आ चुका है। आंत्रप्रेन्योरशिप की दुनिया में एंट्री मारने को बेताब लोगों को रोड मैप दे रहे हैं अमित मिश्रा:

स्टेप 1 - वॉट इज योर आइडिया
सर जी यह बात भले ही आप कई बार सुन चुके हों कि एक आइडिया आपकी दुनिया बदल सकता है लेकिन है यह सौ फीसदी सच। आप अपने आसपास नजर दौड़ाइए और देखिए किसी एक इंसान की आइडिए ने ही दुनिया बदल रखी है। वह चाहें आपके किचन में सीटी देने वाला कुकर(इसे 20वीं सदी का सबसे बड़ा अविष्कार माना गया है) हो या भारत समेत दुनिया भर में एक नई सोसाइटी खड़ी कर देने वाला फेसबुक, सभी की शुरुआत एक आइडिए से हुई। बरसों से संजोए अपने आइडिए को परवान चढ़ाने से पहले चंद सवाल खुद से पूछें

-क्या मेरी सर्विस या प्रॉडक्ट की वाकई में किसी को जरूरत है?
-क्या इस जरूरत को पूरा करने के लिए शुरू किए बिजनस से आपको फायदा होगा?
-क्या मेरे आइडिए पर पहले से कंपनियां काम कर रही हैं अगर हां तो आप उनसे कैसे बेहतर या अलग हैं।
-क्या आइडिए को जमीन पर लाना प्रैक्टिकल तरीके से संभव है?
-मेरा आइडिया कितना लीगल है?
-क्या यह सेफ है?
-मेरा आइडिया अच्छा तो है लेकिन क्या इसे लोगों तक पहुंचाना मुमकिन है?
-इसे बनाने और इसकी मार्केटिंग में आने वाला खर्च को जुटाना क्या मुमकिन है?
-बिजनस से मुनाफा मिलने की दर इतनी होगी कि मैं सफलता से अपने आइडिए की जमीन पर जमाए रख सकूं?
-अगर बेसिक आइडिया सफल हो गया तो क्या वक्त के हिसाब से इसके और वर्जन निकालना मुमकिन होगा?
-क्या मैं अपने आइडिया को कॉपीराइट या पेटेंट के जरिए सेफ करने की स्थिति में हैं?
-कहीं मेरे आइडिया किसी दूसरे के पेटेंट या कॉपीराइट का उल्लंघन तो नहीं है?
-क्या इसके लिए कच्चा माल और मैन पावर उपलब्ध है?

अगर आपका आइडिया इन कसौटियों पर खरा नहीं उतरता तो कोई गम नहीं मतलब साफ है इसे और रिफाइन करने का वक्त निकलना पड़ेगा। अगर आइडिया फिट है तो अगला स्टेप एक्सपरिएंस सर्वे का आता है।

स्टेप 2 : क्या है एक्सपीरिएंस सर्वे
इसका मतलब है आपने आइडिए से जुड़े प्रफेशनल्स से मिलना चाहिए और उनकी इनसाइट का फायदा उठाना चाहिए। ये लोग आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

इंजीनियर: यह वक्त तकनीक का है और आपके आइडिए से जुड़े इंजीनियर से बेहतर इसके बारे में कोई नहीं बता सकता। उससे बिजनस के तकनीकी पहलू पर राय ले सकते हैं।
सप्लायर: आपके बिजनस आइडिए में कच्चे माल या सर्विसेज में सप्लाई चेन की बड़ी भूमिका है। इसलिए इसकी उपलब्धता और रेट्स की जानकारी लेकर रखना जरूरी है।
एजेंट: कई बार आपके बिजनस आइडिए और उसके कस्टमर के बीच एजेंट की भूमिका अहम होती है। ऐसे में उससे बात करना होगा बेहतर आइडिया।
सरकारी अधिकारी/वकील: इनसे सेफ्टी लाइसेंस, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, लेबलिंग या डिस्क्लेमर से जुड़ी सलाह ले सकते हैं।

इस सबके अलावा आपका आइडिया चाहें जितना भी ओरिजनल क्यों न हो इस बात की गुंजाइश बनी रहती है कि कोई और भी इसे कर रहा हो। इसलिए जितना हो सके रिसर्च कर लें। इसमें इंटरनेट मददगार हो सकता है। मार्केट में कंपिटिशन के बारे में भी रिसर्च जरूरी है। बेहतर होगा कि उनकी प्राइसिंग, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रॉफिट के बारे में अच्छी तरह से जान लें। ऐसा करने में इकॉनॉमिक अफेयर से जुड़े न्यूज पोर्टल, अखबार और मैगजीन आपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं।

स्टेप 3 : कंपनी रजिस्ट्रेशन
भारत में किसी भी कंपनी को रजिस्टर्ड करने के लिए बाकायदा मिनस्ट्री ऑफ कार्पोरेट अफेयर काम करती है। भारत में कंपनियां दो स्वरूपों, सोल प्रोप्राइटरशिप और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह रजिस्टर कराया जा सकता है।

- कंपनी लॉ के अनुसार किसी भी रजिस्टर्ड कंपनी के लिए कम से कम 2 पार्टनर और 2 शेयर होल्डर होना जरूरी है।
- शेयर होल्डर्स किसी भी हाल में 50 से ज्यादा नहीं हो सकते।
- किसी भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में आम पब्लिक शेयर नहीं खरीद सकती है।
- ऑनलाइन रडिस्ट्रेशन के लिए www.mca.gov.in/MCA21/RegisterNewComp.html पर जा सकते हैं।
- सोल प्रोप्राइटरशिप बिजनस करने के लिए किसी कंपनी लॉ के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ता।
- नई कंपनी खोलने का यह आसान और पुराना तरीका है।
- ऐसी कंपनी का बैंक अकाउंट तो कंपनी के नाम पर ही होता है लेकिन उसे ऑपरेट कंपनी का फाउंडर अपने सिग्नेचर से ही करता है।
- इसमें किसी भी तरह के कम से कम या अधिक से अधिक पैसे की लिमिट नहीं होती।
- ऐसी कंपनी की पहचान उसके ओनर से ही होती है और इसके अलावा उसकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती।

स्टेप 4 : फंड का जुगाड़
इतना सब करने के बाद भी एक सचाई का सामना आपको करना पड़ेगा कि आपका बेहतरीन आइडिया अभी कागजों पर ही है। इसे जमीन पर लाने के लिए सबसे जरूरी चीज यानी 'कैपिटल' यानी पैसे। इसके इंतजाम के लिए अनुभवी बिजनसमैन तरीके बताते हैं:

1 - अपना पैसा लगा कर
2- बैंक से लोन लेकर
3 - किसी पार्टनर को फाइनैंसर बना कर या प्राइवेट इक्विटी (हिस्सेदारी) देकर
4 - VC (वेंचर कैपिटलिस्ट) के सहारे कैसे मिलेगा बैंक से लोन
- अपना बिजनस शुरू करने के लिए अगर आपको बैंक लोन लेना है तो कंपनी लॉ के तहत रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है।
- इसके बाद कंपनी को मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज से अप्रूवल लेना होगा। यह तब ही मिलेगा जब इस मिनिस्ट्री की गाइडलाइन पर आप खरे उतरेंगे। इसकी पूरी जानकारी के लिए आप dcmsme.gov.in पर जाकर ले सकते हैं।
- एक बार यहां से अप्रूव हो जाने के बाद बैंक 1 करोड़ तक का लोन बिना कुछ गिरवी रखे दे सकता है।
- बैंक लोन देते वक्त खाता खुलवाते वक्त की गई औपचारिकताओं के अलावा बिजनस की प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी मांगती है।
- अगर प्रोडक्शन से जुड़ा बिजनस शुरू करते हैं तो पॉल्यूशन और लेबर मिनिस्ट्री से मिलने वाली एनओसी भी देनी पड़ती है।
- अगर कंपनी सोल प्रोप्राइटरशिप (केवल एक इंसान द्वारा चलाई जा रही) वाली है या शुरू करने के लिए पैसा चाहती है तो उसे स्टेट लेवल पर चलने वाले डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज से संपर्क करना होता है। हर स्टेट में इनके लिए अलग-अलग मापदंड रखे गए हैं।

प्राइवेट इक्विटी का जोर या वेंचर कैपिटलिस्ट की ओर किसी भी आइडिया को उड़ान देने के लिए जरूरी है कि फंडिंग के फंडे को पूरी तरह से समझा जाए। बैंक से लोन लेकर बिजनस करने का पारंपरिक तरीका अब यूथ को उतना पसंद नहीं आ रहा जितना प्राइवेट इक्विटी या वेंचर कैपिटलिस्ट के जरिए बिजनस शुरू करके आ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि लोन लेकर बिजनस करने में सारा दरोमदार आप पर आ जाता है जबिक वेंचर कैपिटलिस्ट आइजिएशन से लेकर एक्सपर्ट एडवाइस तक देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। वैसे देखा जाए तो वेंचर कैपिटलिस्ट और प्राइवेट इक्विटी बिजनस के लिए पैसा जुटाने का मिलता जुलता ही तरीका है जिसमें आपके आइडिया के पीछे पैसा लगाने के बदले आपको प्रॉफिट शेयर करना होता है। लेकिन कुछ अंतर हैं तो प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटलिस्ट को अलग-अलग करते हैं।

प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर

-यह अक्सर पहले से कमाई करने वाली कंपनी या घाटे में चल रही कंपनियों पर पैसा लगाना चाहते हैं।
-यह हर तरह की कंपनियों पर पैसा लगाती हैं और मुनाफा को ही महत्व देते हैं।
-ये बड़ी फंडिंग के लिए आराम से तैयार हो जाती हैं। बिजनस मॉडल और साइज के हिसाब से इन्वेस्मेंट की रकम तय करते हैं।
-कम से कम 6 से 10 साल तक में पूरी फंडिंग करती हैं।
-अक्सर कंपनी पर पूरा कंट्रोल रखती हैं और बड़े शेयर की डिमांड करते हैं।
-इन्वेस्ट कंपनी के रोजमर्रा के काम में ज्यादा एक्टिव नहीं रहते जब तक कि कंपनी पॉलिसी के लेवल पर कोई भारी बदलाव न करना चाहे। वेंचर कैपिटलिस्ट
-किसी आइडिया को बिजनस की शक्ल देने की शुरुआत में ही वेंचर कैपिटलिस्ट का बड़ा रोल होता है। कम पूंजी से शुरू किए गए बिजनस को अक्सर इनसे फायदा होता है।
-इस तरह की फंडिंग अक्सर हाई ग्रोथ सेक्टर वाले बिजनस जैसे आईटी, बायोमेडिकल और अल्टरनेच एनर्जी आदि सेक्टर में ज्यादा होती है।
-छोटे इन्वेस्टमेंट के लिए ही तैयार होती हैं। अक्सर वेंचर कैपिटलिस्ट 10 लाख रुपये तक की रकम ही फंड करते हैं।
-फंडिंग पीरियड 4 से लेकर 7 साल का होता है।
-वेंचर कैपिटलिस्ट कंपनी में अक्सर छोटे शेयर ही लेती हैं लेकिन शर्तें आइडिया देने वाले और कंपनी के बीच तय होती हैं।
-इन्वेस्टर हर मुकाम पर राय देते हैं और अपने कनेक्शन और डिस्ट्रिब्यूशन सर्कल का भी फायदा देते हैं।

स्टेप 5 - प्लान होना चाहिए दमदार
अपने बिजनस के जमीन पर लाने के लिए जरूरी है एक बिजनस प्लान। यह प्लान वह दस्तावेज है यह दिखाता है कि आप कितनी गहराई से अपने बिजनस को समझते हैं और यही इन्वेस्टर को आपकी ओर आकर्षित करेगा।

बिजनस प्लान के मुख्य फीचर्स होते हैं:
बिजनस डिटेल्स:
1-नाम
2-लोकेशन
3-प्रॉडक्ट
4-मार्केट और कॉम्पिटिशन
5-मैनेजमेंट का अनुभव (किसी भी तरह का)
-बिजनस से आप क्या पाना चाहते हैं और कैसे पाना चाहते हैं इसके बारे में भी एक नोट लिखें।
-कितने फंड की जरूरत है फंड के लिए एप्लीकेशन

मार्केट अनैलेसिस:
1-अपने प्रॉडक्ट से जुड़ी पूरी मार्केट का ब्योरा
2-इंडस्ट्री के ट्रेंड की जानकारी
3-टारगेट मार्केट क्या है?

प्रॉडक्ट या सर्विस:
1-प्रॉडक्ट या सर्विस लाइन का पूरा ब्यौरा
2-पेटेंट, कॉपीराइट और लीगल इश्यू

मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस (अगर है तो):
1-मैटीरियल
2-कच्चे माल की सप्लाई का ब्यौरा
3-प्रॉडक्शन का तरीका

मार्केटिंग की रणनीति:
1-किन तरीकों से होगी मार्केटिंग
2-प्रॉडक्ट या सर्विस की कीमत कितनी होगी
3-प्रॉडक्ट या सर्विस बेचने का कौन सा तरीका आजमाएंगे

मैनेजमेंट प्लान:
1-किस तरह का ऑफिस ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर आपनाएंगे
2-बोर्ड ऑफ डायरेक्टर या ओनरशिप किसके पास होगी
3-कामों की जिम्मेदारी किस पर कौन सी होगी
4-स्टाफ प्लान या कितने कर्मचारी होंगे

5-अगले एक या दो साल तक बिजनस चलाने का ऑपरेशनल प्लान

इनक्यूबेटर और एसेलरेटर को भी समझें
बिजनस की शुरुआत करने वालों के लिए इन दो शब्दों के मायने जानना बहुत जरूरी हैं। इन्क्यूबेटर आपको अपने आइडिया के शुरुआती दौर में उसे प्रॉडक्ट के लेवल तक ले जाने में मदद करता है। इस दौरान वह एक्सपर्ट सलाह तो देता ही है साथ ही पूरे आइडिया को फाइन ट्यून करने का काम भी करता है। एसेलरेटर, जैसा कि नाम से ही पता चलता है आपके आइडिया को स्पीड देने का काम करता है। इनका रोल तब अधिक होता है जब एक बिजनस आइडिया चल तो निकला है लेकिन बड़ा बनने में कुछ कसर बाकी है। यह तय वक्त के लिए आपके बिजनस आइडिया को अपने सहारे ऊंची उड़ान दिलाने में मदद करते हैं। इन्क्यूबेटर और एसेलरेटर अमूमन नए बिजनस आइडिया को एक ऑफिस स्पेस के साथ ही एक्सपर्ट्स की मदद भी दिलाते हैं।ये दोनो ही बेहतरीन आइडिया को हर मुकाम पर पालने पोसने की जिम्मेदारी उठाते हैं ।

यहां से मिलेगी आपको मदद
हम कुछ ऐसे ठिकानों के बारे में दे रहे हैं जो आपके आइडिया को एक मुकाम देने का काम कर सकते हैं।

इंडियन एंजल नेटवर्क इनक्यूबेटर
दिल्ली भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉल्जी का चलाया गया यह बेहतरीन आंत्रप्रेन्योरशिप प्रोग्राम है जिसमें आइडिया को बेहतरीन तरीके से सपोर्ट किया जाता है। यहां किसी भी वेंचर को 18-24 महीने तक इनक्यूबेट किया जाता है। एक्सपर्ट्स का इनसे बढ़िया नेटवर्क फिलहाल भारत में मौजूद नहीं है।

टेक्नॉलजी बिजनस इन्क्यूबेटर
आईआईटी दिल्ली हालांकि यह केवल तकनीकी बिजनस को ही बढ़ाने में मदद करते हैं लेकिन इनके सहारे कई आईआईटी स्टूडेंट्स ने अपने आइडिया को बड़ा बनाया है। इसमें आईआईटी किसी भी अच्छे बिजनस आइडिया को वेंचर कैपिटलिस्ट की मदद से आगे बढ़ाती है। एक्सपर्ट्स के लिहाज से यह किसी भी आइडिया को शुरू करने के लिए अच्छी जगह साबित हो सकती है।

टीलैब्स
दिल्ली यह टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड का एक एसेलेरेटर है जो 10 फीसदी हिस्सेदारी के बदले 10 लाख रुपये तक फंड करता है। 13 महीने का इस प्रोग्राम को बिजनस जगत की बड़ी हस्तियां मेंटर करती हैं। यह ऑफिस के लिए जगह भी देते हैं। प्रोग्राम की शुरुआत फरवरी और अगस्त में होती है।

सोसाइटी फॉर इनोवेशन ऐंड आंत्रप्रेन्योरशिप, आईआईटी मुंबई
साइंस और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में एंटप्रेन्योरशिप के लेवल पर चलने वाली किसी भी रिसर्च या शुरुआत को आईआईटी मुंबई का यह हिस्सा बखूबी करता है। इसे भी सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉल्जी का सपोर्ट मिलता है। हालांकि यहां केवल आईआईटी मुंबई से जुड़े स्टूडेंट्स को ही मौका मिल पाता है।

अनलिमिटेड इंडिया (UnLtd) मुंबई
यह सोशल आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिहाज से बेहतरीन इनवेस्टर साबित हो सकता है। यहां एक्सपर्ट्स की देखरेख में बेहतरीन स्टार्टअप इनक्यूबेशन के साथ-साथ सीड फंडिंग (बिजनस शुरु करने के लिए पैसा) का जुगाड़ भी हो जाता है। 3 टियर की फंडिग में 80 हजार से 20 लाख तक की फंडिंग हो सकती है।

सिडबी इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर, आईआईटी कानपुर
छोटी इंडस्ट्रीज को मदद करने के लिहाज से आईआईटी कानपुर का यह प्रोग्राम काफी खास है जो स्मॉल इडस्ट्रीज डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट के सहयोग से चल रहा है। यह न केवल टेक्नॉल्जी बेस आइडिया को सपोर्ट करता है बल्कि उन्हें बड़े बिजनस की शक्ल देने के लिहाज से सपोर्ट भी करता है। छोटे लेवल के बिजनस आइडिया के लिहाज से इस सेंटर को एक्सपर्ट माना जाता है।