This blog is designed to motivate people, raise community issues and help them. लोगों को उत्साहित करना, समाज की ज़रुरतों एवं सहायता के लिए प्रतिबद्ध
Wednesday, May 18, 2011
Saturday, May 7, 2011
टिकेश्वरी
Source: दैनिक भास्कर , रीना पाल
रायपुर.परिवार के साथ आधे पेट भोजन करके सीजी बोर्ड की बारहवीं परीक्षा की मेरिट लिस्ट में पांचवें नंबर पर आने वाली टिकेश्वरी साहू की मदद करने दर्जनों हाथ आगे बढ़े हैं। इसमें से कई लोग ऐसे हैं, जो नाम तक गुप्त रखना चाहते हैं।
सबकी इच्छा यही है कि फैक्ट्री मजदूर की बेटी टिकेश्वरी खूब मन लगाकर बढ़े और सीए बनने के अपने सपने को पूरा करे। भास्कर में छपा अपना फोटो, हर तरफ से मिल रही तारीफ और सुबह से शाम तक घर पर मिलने आने वाले लोगों का सिलसिला।
भीड़ इतनी थी कि मां-पिताजी शनिवार को काम पर ही नहीं जा सके। घर में खाना तो बना, लेकिन खाने की भी फुरसत किसी को नहीं मिली। सारा कुछ उसे किसी परीकथा की तरह लग रहा है। ऐसा कुछ तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था।
शनिवार को दिनभर टिकेश्वरी साहू को शनिवार को भी बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। साथ ही उसकी आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कई शैक्षणिक संस्थानों के अलावा अन्य लोगों ने भी व्यक्तिगत तौर पर उसकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है।
मदद करने वाले हर तरह के लोग हैं। उरला के एक उद्योगपति ने उसके शिक्षक को फोन करके सीए बनने तक की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का भरोसा दिलाया है। आग्रह केवल इतना कि उद्योगपति का नाम कहीं नहीं आना चाहिए।
उद्योगपति ने भास्कर से इतना ही कहा कि वह चाहते हैं कि यह मेधावी छात्रा खूब पढ़े। पैसा उसके लिए समस्या नहीं होगा। तिल्दा में रहने वाले एक व्यक्ति ने भी टिकेश्वरी साहू के परिवार को पूरी मदद देने का प्रस्ताव दिया है।
शाम को बीरगांव के नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश देवांगन और पूर्व शिक्षा मंत्री सत्यनारायण शर्मा के पुत्र पंकज भी छात्रा से मिलने घर पहुंच गए। हर तरह से आ रहे मदद के प्रस्तावों से छात्रा के अलावा उसके माता-पिता भी दुविधा में हैं। किसकी मदद लें, किसे विनम्रता से मना करें।
टिकेश्वरी ने बताया- शुक्रवार को रिजल्ट के बाद दिनभर गुरुजी के साथ मीडियाकर्मियों से बात कर-करके मेरी हालत खराब थी। घर आकर सोई तो सीधे सुबह 7 बजे नींद खुली। बहुत दिन बाद शुक्रवार की रात चैन से सोई। सुबह अपने टीचर के फोन से नींद खुली।
वे मुझे बता रहे थे कि तुम्हारा फोटो सारे पेपर में छपा है। घर में तो सारे अखबार आते नहीं, इसलिए छोटे भाई ने साइकिल उठाई और स्कूल गया। वहां से सारे पेपर लेकर आया। घर के सारे लोग अखबार ठीक से देख भी नहीं पाए थे कि लोगों के घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
टिकेश्वरी पढ़ो, खूब पढ़ो
कोई अपने संस्थान में मुझे निशुल्क पढ़ाई के लिए बुला रहा है तो कोई भाई-बहन को पुरस्कार राशि देने की बात कर रहा है। रिजल्ट के दूसरे दिन करीब दर्जन भर लोगों ने मुझसे और मेरे मां-पिताजी से संपर्क कर कुछ ऐसी ही बातें कहीं। जब इतने लोग आगे आ रहे हैं तो जिस स्कूल में मैं पढ़ी वह कैसे पीछे रह जाता।
गुरुकुल स्कूल से मुझे 21 हजार रुपए पुरस्कार के रूप में दिए जाने की भी सूचना दी गई। कर्मचारी राज्य बीमा निगम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के क्षेत्रीय निदेशक जीके डागर ने भी मेरी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है।
श्री डागर ने कहा, मेरा बेटा सीए है और मैं बखूबी यह जानता हूं कि इस पढ़ाई में कितना खर्चा आएगा। मैं टिकेश्वरी के परिवार वालों से मिलूंगा, वह जैसी मदद चाहेंगे, मैं उस स्तर पर जाकर मदद करने के लिए तैयार हूं।
अभी भी लग रहा है सपना, आगे पढ़ाई की उम्मीद जागी
मीडिया वालों ने शनिवार को भी ढेरों सारे सवाल किए। यकीन नहीं हो रहा कि यह सच है या सपना, रिजल्ट आने के बाद से यह लाइन कितनी बार बोल चुकी हूं यह मुझे खुद को याद नहीं। लोग मुझे और मेरे परिवार को आर्थिक मदद देने की बात कर रहे हैं।
ऐसा हुआ तो मैं आगे की पढ़ाई तो कर ही सकूंगी, साथ ही मेरे घर की हालत भी सुधर जाएगी। मां-पिताजी पहले समझ नहीं पा रहे थे कि हो क्या रहा है। मैंने बताया कि वह लोग पैसे देने की बात कर रहे हैं, ताकि मैं आगे पढ़ सकूं। इस पर उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान तो आई, लेकिन इस बार भी वह ज्यादा कुछ नहीं कह सके।.
रायपुर.परिवार के साथ आधे पेट भोजन करके सीजी बोर्ड की बारहवीं परीक्षा की मेरिट लिस्ट में पांचवें नंबर पर आने वाली टिकेश्वरी साहू की मदद करने दर्जनों हाथ आगे बढ़े हैं। इसमें से कई लोग ऐसे हैं, जो नाम तक गुप्त रखना चाहते हैं।
सबकी इच्छा यही है कि फैक्ट्री मजदूर की बेटी टिकेश्वरी खूब मन लगाकर बढ़े और सीए बनने के अपने सपने को पूरा करे। भास्कर में छपा अपना फोटो, हर तरफ से मिल रही तारीफ और सुबह से शाम तक घर पर मिलने आने वाले लोगों का सिलसिला।
भीड़ इतनी थी कि मां-पिताजी शनिवार को काम पर ही नहीं जा सके। घर में खाना तो बना, लेकिन खाने की भी फुरसत किसी को नहीं मिली। सारा कुछ उसे किसी परीकथा की तरह लग रहा है। ऐसा कुछ तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था।
शनिवार को दिनभर टिकेश्वरी साहू को शनिवार को भी बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। साथ ही उसकी आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कई शैक्षणिक संस्थानों के अलावा अन्य लोगों ने भी व्यक्तिगत तौर पर उसकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है।
मदद करने वाले हर तरह के लोग हैं। उरला के एक उद्योगपति ने उसके शिक्षक को फोन करके सीए बनने तक की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का भरोसा दिलाया है। आग्रह केवल इतना कि उद्योगपति का नाम कहीं नहीं आना चाहिए।
उद्योगपति ने भास्कर से इतना ही कहा कि वह चाहते हैं कि यह मेधावी छात्रा खूब पढ़े। पैसा उसके लिए समस्या नहीं होगा। तिल्दा में रहने वाले एक व्यक्ति ने भी टिकेश्वरी साहू के परिवार को पूरी मदद देने का प्रस्ताव दिया है।
शाम को बीरगांव के नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश देवांगन और पूर्व शिक्षा मंत्री सत्यनारायण शर्मा के पुत्र पंकज भी छात्रा से मिलने घर पहुंच गए। हर तरह से आ रहे मदद के प्रस्तावों से छात्रा के अलावा उसके माता-पिता भी दुविधा में हैं। किसकी मदद लें, किसे विनम्रता से मना करें।
टिकेश्वरी ने बताया- शुक्रवार को रिजल्ट के बाद दिनभर गुरुजी के साथ मीडियाकर्मियों से बात कर-करके मेरी हालत खराब थी। घर आकर सोई तो सीधे सुबह 7 बजे नींद खुली। बहुत दिन बाद शुक्रवार की रात चैन से सोई। सुबह अपने टीचर के फोन से नींद खुली।
वे मुझे बता रहे थे कि तुम्हारा फोटो सारे पेपर में छपा है। घर में तो सारे अखबार आते नहीं, इसलिए छोटे भाई ने साइकिल उठाई और स्कूल गया। वहां से सारे पेपर लेकर आया। घर के सारे लोग अखबार ठीक से देख भी नहीं पाए थे कि लोगों के घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
टिकेश्वरी पढ़ो, खूब पढ़ो
कोई अपने संस्थान में मुझे निशुल्क पढ़ाई के लिए बुला रहा है तो कोई भाई-बहन को पुरस्कार राशि देने की बात कर रहा है। रिजल्ट के दूसरे दिन करीब दर्जन भर लोगों ने मुझसे और मेरे मां-पिताजी से संपर्क कर कुछ ऐसी ही बातें कहीं। जब इतने लोग आगे आ रहे हैं तो जिस स्कूल में मैं पढ़ी वह कैसे पीछे रह जाता।
गुरुकुल स्कूल से मुझे 21 हजार रुपए पुरस्कार के रूप में दिए जाने की भी सूचना दी गई। कर्मचारी राज्य बीमा निगम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के क्षेत्रीय निदेशक जीके डागर ने भी मेरी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है।
श्री डागर ने कहा, मेरा बेटा सीए है और मैं बखूबी यह जानता हूं कि इस पढ़ाई में कितना खर्चा आएगा। मैं टिकेश्वरी के परिवार वालों से मिलूंगा, वह जैसी मदद चाहेंगे, मैं उस स्तर पर जाकर मदद करने के लिए तैयार हूं।
अभी भी लग रहा है सपना, आगे पढ़ाई की उम्मीद जागी
मीडिया वालों ने शनिवार को भी ढेरों सारे सवाल किए। यकीन नहीं हो रहा कि यह सच है या सपना, रिजल्ट आने के बाद से यह लाइन कितनी बार बोल चुकी हूं यह मुझे खुद को याद नहीं। लोग मुझे और मेरे परिवार को आर्थिक मदद देने की बात कर रहे हैं।
ऐसा हुआ तो मैं आगे की पढ़ाई तो कर ही सकूंगी, साथ ही मेरे घर की हालत भी सुधर जाएगी। मां-पिताजी पहले समझ नहीं पा रहे थे कि हो क्या रहा है। मैंने बताया कि वह लोग पैसे देने की बात कर रहे हैं, ताकि मैं आगे पढ़ सकूं। इस पर उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान तो आई, लेकिन इस बार भी वह ज्यादा कुछ नहीं कह सके।.
Saturday, February 19, 2011
दान में दे दी खरबों की दौलत, अब है 'बे-कार'
सौजन्य से : दैनिक भास्कर
वह अरबपति है और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार है लेकिन उसके पास अपना कोई आशियाना नहीं है सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन सच है। उसका नाम है निकोलस बर्जुएन और उसकी कुल संपत्ति है 3 अरब डॉलर यानि लगभग 138 अरब रुपए। उसने अपना सारा कुछ बेच दिया है यहां तक कि महलनुमा घर भी। अब उनके पास न तो घर है और न ही कार।
नतीजतन वह किराए की गाड़ियों में घूमते हैं और होटलों में रहते हैं। इसका एक कारण यह भी है कि यह अभी तक कुंवारे हैं। 49 वर्षीय निकोलस के पास अपना एक जेट विमान जरुर है जिससे वह सारी दुनिया घूमते रहते हैं इस जेट से वह भारत का भी दौरा कर चुके हैं। उनका पैसा कई देशों में लगा है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग लेने आए निकोलस धन दौलत से उदासीन हो गए हैं। वह मानते हैं कि पैसे से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता है और इसलिए वह अपना पैसा चैरिटी में दे रहे हैं। उन्होंने अपना सब कुछ दान में दे दिया है अब उनके पास सिर्फ कुछ किताबे, कमीज, पैंट वगैरह हैं जिन्हे वह एक बैग में समेटकर सारी दुनिया घूमते हैं।
पेरिस में जन्मे निकोलस को भारत से बेहद प्रेम है वह भारत के बारे में हर बात को ध्यान से सुनते हैं। भारत संबंधित हर बैठक में भाग लेते हैं वह भारतीय मंत्री कमलनाथ के अच्छे मित्र हैं। भारत में उन्होंने करीब 20 करोड़ डॉलर निवेश किया है। भारत में उन्होने रियल एस्टेट के अलावा होटलों में निवेश किया है। उन्होंने जर्मनी के रिटेल ग्रुप कार्सटाट में भी भारी निवेश किया है।
वह अरबपति है और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार है लेकिन उसके पास अपना कोई आशियाना नहीं है सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे लेकिन सच है। उसका नाम है निकोलस बर्जुएन और उसकी कुल संपत्ति है 3 अरब डॉलर यानि लगभग 138 अरब रुपए। उसने अपना सारा कुछ बेच दिया है यहां तक कि महलनुमा घर भी। अब उनके पास न तो घर है और न ही कार।
नतीजतन वह किराए की गाड़ियों में घूमते हैं और होटलों में रहते हैं। इसका एक कारण यह भी है कि यह अभी तक कुंवारे हैं। 49 वर्षीय निकोलस के पास अपना एक जेट विमान जरुर है जिससे वह सारी दुनिया घूमते रहते हैं इस जेट से वह भारत का भी दौरा कर चुके हैं। उनका पैसा कई देशों में लगा है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग लेने आए निकोलस धन दौलत से उदासीन हो गए हैं। वह मानते हैं कि पैसे से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता है और इसलिए वह अपना पैसा चैरिटी में दे रहे हैं। उन्होंने अपना सब कुछ दान में दे दिया है अब उनके पास सिर्फ कुछ किताबे, कमीज, पैंट वगैरह हैं जिन्हे वह एक बैग में समेटकर सारी दुनिया घूमते हैं।
पेरिस में जन्मे निकोलस को भारत से बेहद प्रेम है वह भारत के बारे में हर बात को ध्यान से सुनते हैं। भारत संबंधित हर बैठक में भाग लेते हैं वह भारतीय मंत्री कमलनाथ के अच्छे मित्र हैं। भारत में उन्होंने करीब 20 करोड़ डॉलर निवेश किया है। भारत में उन्होने रियल एस्टेट के अलावा होटलों में निवेश किया है। उन्होंने जर्मनी के रिटेल ग्रुप कार्सटाट में भी भारी निवेश किया है।
Friday, January 28, 2011
Thursday, January 20, 2011
कविता : मिट्टी
- श्रीमती लीला तिवानी (नवभारतटाइम्स)
मिट्टी किसी भी तरह सोने या चांदी से कम नहीं है,
कि मिट्टी में ही अंकुर फूट सकते हैं, सोने या चांदी में नहीं.
दीपक किसी भी तरह सूरज या चांद से कम नहीं है,
कि दीपक दिन में या रात में, अंदर या बाहर, उजाला करने में सक्षम है सूरज या चांद नहीं.
स्वास्थ्य किसी भी तरह धन-दौलत से कम नहीं है,
कि स्वस्थता ही सफलता की निर्णायक है, केवल धन-दौलत ही नहीं.
सद्गुण किसी भी तरह उच्च पद से कम नहीं है,
कि सद्गुण ही मानवता के परिचायक हैं, केवल उच्च पद ही नहीं.
संयम किसी भी तरह आनंद से कम नहीं है,
कि संयम की आंतरिक मस्ती की लहरें ही सदैव, आनंद के परचम को फहराती है.
कोई शिक्षाप्रद रचना किसी महानतम कृति से कम नहीं हैं,
कि शिक्षाप्रद रचना ही समाज का मार्गदर्शन कर उसे आगे बढ़ाती है.
एक सच्चा मानव किसी देवता से कम नहीं है,
कि मानव की सच्ची मानवता देवताओं के देवत्व से कम नहीं है....
कि मिट्टी में ही अंकुर फूट सकते हैं, सोने या चांदी में नहीं.
दीपक किसी भी तरह सूरज या चांद से कम नहीं है,
कि दीपक दिन में या रात में, अंदर या बाहर, उजाला करने में सक्षम है सूरज या चांद नहीं.
स्वास्थ्य किसी भी तरह धन-दौलत से कम नहीं है,
कि स्वस्थता ही सफलता की निर्णायक है, केवल धन-दौलत ही नहीं.
सद्गुण किसी भी तरह उच्च पद से कम नहीं है,
कि सद्गुण ही मानवता के परिचायक हैं, केवल उच्च पद ही नहीं.
संयम किसी भी तरह आनंद से कम नहीं है,
कि संयम की आंतरिक मस्ती की लहरें ही सदैव, आनंद के परचम को फहराती है.
कोई शिक्षाप्रद रचना किसी महानतम कृति से कम नहीं हैं,
कि शिक्षाप्रद रचना ही समाज का मार्गदर्शन कर उसे आगे बढ़ाती है.
एक सच्चा मानव किसी देवता से कम नहीं है,
कि मानव की सच्ची मानवता देवताओं के देवत्व से कम नहीं है....
Wednesday, January 12, 2011
स्वामी विवेकानंद
विवेकानंद का आह्वान, भारत के नाम
भारत के कल्याण में मेरा कल्याण है
ऐ भारत ! क्या दूसरों की ही हाँ में हाँ मिला कर, दूसरों की ही नकल कर,परमुखापेक्षी होकर इस दासों की सी दुर्बलता, इस घृणित जघन्य निष्ठुरता से ही तुम बड़े-बड़े अधिकार प्राप्त करोगे? क्या इसी लज्जास्पद कापुरुषता से तुम वीरभोग्या स्वाधीनता प्राप्त करोगे?

ऐ भारत ! तुम मत भूलना कि तुम्हारे उपास्थ सर्वत्यागी उमानाथ शंकर हैं, मत भूलना कि तुम्हारा विवाह, धन और तुम्हारी स्त्रियों का आदर्श सीता,सावित्री,दमयन्ती है। मत भूलना कि तुम्हारा जीवन इन्द्रिय सुख के लिए, अपने व्यक्तिगत सुख के लिए नहीं है।
मत भूलना कि तुम जन्म से ही माता के लिए बलिदान स्वरूप रखे गए हो, मत भूलना की तुम्हारा समाज उस विराट महामाया की छाया मात्र है, तुम मत भूलना कि नीच,अज्ञानी,दरिद्र,मेहतर तुम्हारा रक्त और तुम्हारे भाई हैं। ऐ वीर, साहस का साथ लो ! गर्व से बोलो कि मैं भारतवासी हूँ और प्रत्येक भारतवासी , मेरा भाई है। बोलो कि अज्ञानी भारतवासी, दरिद्र भारतवासी, ब्राह्मण भारतवासी, चांडाल भारतवासी,सब मेरे भाई हैं।
तुम भी कटिमात्र वस्त्रावृत्त होकर गर्व से पुकार कर कहो कि भारतवासी मेरा भाई है, भारतवासी मेरे प्राण हैं, भारत के देव-देवियाँ मेरे ईश्वर हैं। भारत का समाज मेरी शिशुसज्जा,मेरे यौवन का उपवन और मेरे वृद्धावस्था की वाराणसी है।
भाई, बोलो कि भारत की मिट्टी मेरा स्वर्ग है, भारत के कल्याण में मेरा कल्याण है, और दिन-रात कहते रहो कि हे गौरीनाथ,हे जगदम्बे, मुझे मनुष्यत्व दो ! माँ मेरी दुर्बलता और कापुरुषता दूर कर दो, मुझे मनुष्य बनाओ!
भारत के कल्याण में मेरा कल्याण है
ऐ भारत ! क्या दूसरों की ही हाँ में हाँ मिला कर, दूसरों की ही नकल कर,परमुखापेक्षी होकर इस दासों की सी दुर्बलता, इस घृणित जघन्य निष्ठुरता से ही तुम बड़े-बड़े अधिकार प्राप्त करोगे? क्या इसी लज्जास्पद कापुरुषता से तुम वीरभोग्या स्वाधीनता प्राप्त करोगे?

ऐ भारत ! तुम मत भूलना कि तुम्हारे उपास्थ सर्वत्यागी उमानाथ शंकर हैं, मत भूलना कि तुम्हारा विवाह, धन और तुम्हारी स्त्रियों का आदर्श सीता,सावित्री,दमयन्ती है। मत भूलना कि तुम्हारा जीवन इन्द्रिय सुख के लिए, अपने व्यक्तिगत सुख के लिए नहीं है।
मत भूलना कि तुम जन्म से ही माता के लिए बलिदान स्वरूप रखे गए हो, मत भूलना की तुम्हारा समाज उस विराट महामाया की छाया मात्र है, तुम मत भूलना कि नीच,अज्ञानी,दरिद्र,मेहतर तुम्हारा रक्त और तुम्हारे भाई हैं। ऐ वीर, साहस का साथ लो ! गर्व से बोलो कि मैं भारतवासी हूँ और प्रत्येक भारतवासी , मेरा भाई है। बोलो कि अज्ञानी भारतवासी, दरिद्र भारतवासी, ब्राह्मण भारतवासी, चांडाल भारतवासी,सब मेरे भाई हैं।
तुम भी कटिमात्र वस्त्रावृत्त होकर गर्व से पुकार कर कहो कि भारतवासी मेरा भाई है, भारतवासी मेरे प्राण हैं, भारत के देव-देवियाँ मेरे ईश्वर हैं। भारत का समाज मेरी शिशुसज्जा,मेरे यौवन का उपवन और मेरे वृद्धावस्था की वाराणसी है।
भाई, बोलो कि भारत की मिट्टी मेरा स्वर्ग है, भारत के कल्याण में मेरा कल्याण है, और दिन-रात कहते रहो कि हे गौरीनाथ,हे जगदम्बे, मुझे मनुष्यत्व दो ! माँ मेरी दुर्बलता और कापुरुषता दूर कर दो, मुझे मनुष्य बनाओ!
Subscribe to:
Posts (Atom)