Wednesday, November 27, 2013

गोंद

सौजन्य से : www.facebook.com (https://www.facebook.com/AcharyaBalkrishanJi)

किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है . आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पावडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है .
- कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है .
- नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है - पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।
- आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है।
- सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।



- बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है।
- हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है । हींग दो किस्म की होती है - एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं । इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है । हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती
- गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है .
- प्रपोलीश- यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने में तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।
- ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होता है .ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम , पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है.ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है।
- इसके अलावा सहजन , बेर , पीपल , अर्जुन आदि पेड़ों के गोंद में उसके औषधीय गुण मौजूद होते है .

Monday, November 25, 2013

सिरका



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- सिरका कई प्रकार का होता है।अंगूर, सेब, संतरे, अनन्नास, जामुन तथा अन्य फलों के रस, जिनमें शर्करा पर्याप्त है, सिरका बनाने के लिए बहुत उपयुक्त हैं क्योंकि उनमें जीवाणुओं के लिए पोषण पदार्थ पर्याप्त मात्रा में होते हैं।

- आयुर्वेद में सिरके का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। आप अपने बालों को सुंदर बनाने के लिए भी सिरके का प्रयोग कर सकते हैं। सिरका बालों के लिए अच्छा है । डेंड्रफ, जूं जैसी समस्याओं से बचने के लिए सिरके का प्रयोग लाभकारी है। बालों की अच्छी तरह से सफाई और बालों को स्व्स्थ रखने में सिरके का इस्तेमाल किया जाता है। बालों की कंडीशनिंग के लिए भी सिरके का इस्तेमाल किया जा सकता है।

- बालों में होने वाले फुंसी, फंगस और इसी तरह की अन्य समस्याओं को दूर करने और बैक्टीरिया इत्यादि को नष्ट करने में भी सिरके का प्रयोग किया जाता है।

- बालों की चमक बरकरार रखने के लिए और बालों को मुलायम और सुंदर बनाने के लिए सिरके से किफायती कुछ भी नहीं।

- सिरके से बालों को सीधा भी किया जा सकता है। यदि रूखे और घुंघराले बालों को सीधा करना है तो सिरके का प्रयोग करना चाहिए। ऐसे में आपको चाहिए कि आप सेब के सिरके से बालों को धोएं और इससे जल्द ही आप बाल सीधे कर पाएंगे।

- भोजन के साथ सिरका खाने से रक्त पतला होता है।

- सिरका, चर्बी कम करने और शरीर से विषैले पदार्थ निकालने की प्रक्रिया में सहायक होता है तथा इससे रक्त से वसा और हानिकारक कोलिस्ट्रोल कम होता है।

- सिरका बुद्धि में तीव्रता का कारण बनता है और ह्रदय के लिए लाभदायक होता है।

- सिरके में मौजूद सेट्रिक एसिड आहार में मौजूद कैल्शियम को शरीर का अंश बनाता है और शरीर की भीतरी क्रियाओं के लिए अत्याधिक लाभदायक होता है।

- सिरका, पाचनक्रिया के लिए हानिकारिक बैक्र्टिरिया का नाश करता है। जिन लोगों को पाचनतंत्र की समस्या और क़ब्ज़ तथा दस्त अथवा पेट दर्द में ग्रस्त हैं वह सिरका की सहायता से इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

- सिरके का एक अन्य लाभ यह है कि वह अमाशय की एसिड के स्राव को संतुलित करता है ।

- सिरका दांतों की गंदगी दूर करने और मसूड़े की सूजन में लाभदायक है।

- डाक्टर, कमज़ोर स्नायुतंत्र, गठिया और अल्सर के रोगियों के लिए सिरके को हानिकारक बताते हैं।

- जामुन का सिरका पेट सम्बंधी रोगों के लिए लाभकारक है। जामुन के सिरके से भूख बढ़ती है, पेट की वायु निकलती है , कब्ज दूर होती है व मूत्र साफ होता है।काले पके हुए जामुन साफ धो कर पोछ कर मिटटी के बर्तन में नामक मिलाकर साफ कपडे से बांध कर धुप में रख दे । एक सप्ताह धुप में रखने के पश्चात् इसको साफ कपडे से छान कर रस को कांच के बोतल में भर कर रख दे यह सिरका तैयार है । मुली प्याज गाजर शलजम मिर्च आदि के टुकडे भी उसी सिरके में डालकर इसका उपयोग सलाद पर आसानी से किया जा सकता है ।

- किसी ने धतूरा खा लिया हो, तो उसे अंगूर का सिरका दूध में मिलाकर पिलाने से काफी लाभ होता है।

- एक प्याले में सेब का सिरका, एक कप शहद और छिले हुए लहसुन की आठ गाँठे मिलाओ। इन सबको तेज चलने वाली मिक्सी में डाल कर एक मिनट के लिए चला दो और घोल तैयार करो। इस मिश्रण को एक काँच की बोतल में डाल कर पाँच दिन के लिए फ्रिज में बन्द करके रखो। आम खुराक -दो चम्मच पानी या अंगूर या फलों के रस में डाल कर नाश्ते से पहले लो। इस इलाज से बंद नाड़ियों, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप ( हाई ब्लड प्रैशर), कैंसर की कुछ किस्मों, कोलेस्टरोल की अधिक मात्रा, सर्दी ज़ुकाम, बदहज़मी, सिर दर्द, दिल के रोग, रक्त प्रवाह की समस्या, बवासीर, बांझपन, नपुसंकता, दांत दर्द, मोटापा, अल्सर और बहुत सारी बीमारियाँ ठीक करने में सहायता मिलती है।

- एसीडिटी से निजात पाने के लिए एक ग्लास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका तथा दो चम्मच शहद मिलाकर खाने से पहले सेवन करें।

- हृदय रोग, कैलोस्ट्रोल बढ़ने और खून के थक्के होने की शिकायत है, उनके लिए अनुभूत औषधि जो बरसों पहले एक वृद्ध साधू द्वारा बताई गयी है.अदरक का रस एक कप, लहसून का रस एक कप, नीम्बू का रस एक कप, सेब का सिरका एक कप लेकर, उसको मध्यम आंच पर गर्म करे. जब तीन कप रह जाएँ, तो उसको सामान्य तापमान तक ठंडा कर लें . फिर उसमें तीन कप शहद मिला कर, किसी भी बोतल आदि में रख लें. रोज़ प्रात: खाली पेट, दो चम्मच औषधि को सामान मात्रा में जल मिलाकर, सेवन करें.नाश्ता लगभग आधे घंटे बाद करें.

Sunday, November 24, 2013

चिरौंजी या चारोली

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- चिरौंजी या चारोली पयार या पियाल, प्रियाल नामक वृक्ष के फलों के बीज की गिरी है जो खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है।
- इसका प्रयोग भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है।
- चारोली वर्षभर उपयोग में आने वाला पदार्थ है जिसे संवर्द्धक और पौष्टिक जानकर सूखे मेवों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
- चारोली का वृक्ष अधिकतर सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है। दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, छोटा नागपुर आदि स्थानों पर यह वृक्ष विशेष रूप से पैदा होता है। 


- इसके पत्तों से पत्तल भी बनाई जाती है।
- इस वृक्ष के फल से निकाली गई गुठली को मींगी कहते हैं।
- चारोली बादाम की प्रतिनिधि मानी जाती है। जहाँ बादाम न मिल सकें वहाँ चारोली का प्रयोग किया जा सकता है।
- चारोली स्वाद में मधुर, स्निग्ध, भारी, शीतल एवं हृद्य (हृदय को रुचने वाली) है। देह का रंग सुधारने वाली, बलवर्धक, वायु-दर्दनाशक एवं शिरःशूल को मिटाने वाली है।
- यह मधुर बल वीर्यवर्द्धक, हृदय के लिए उत्तम, स्निग्ध, विष्टंभी, वात पित्त शामक तथा आमवर्द्धक होती है।
- इसका सेवन रूग्णावस्था और शारीरिक दुर्बलता में किया जाता है।
- चारोली का पका हुआ फल भारी होने के साथ-साथ मधुर, स्निग्ध, शीतवीर्य तथा दस्तावार और वात पित्त, जलन, प्यास और ज्वर का शमन करने वाला होता है।
- चिरौंजी कफ को दस्त द्वारा बाहर निकाल देता है।
- शहद चिरौंजी के दोषों को दूर कर इसके गुणों को सुरक्षित रखता है।
- इस वृक्ष के फल की गुठली से निकली मींगी और छाल दोनों उपयोगी होती है।
- चिरौंजी का उपयोग अधिकतर मिठाई में जैसे हलवा, लड्डू, खीर, पाक आदि में सूखे मेवों के रूप में किया जाता है।
- सौंदर्य प्रसाधनों में भी इसका उपयोग किया जाता है।
- मुँहासे- नारंगी और चारोली के छिलकों को दूध के साथ पीस कर इसका लेप तैयार कर लें और चेहरे पर लगाए। इसे अच्छी तरह सूखने दें और फिर खूब मसल कर चेहरे को धो लें। इससे चेहरे के मुँहासे गायब हो जाएँगे। अगर एक हफ्ते तक प्रयोग के बाद भी असर न दिखाई दे तो लाभ होने तक इसका प्रयोग जारी रखें।
- गीली खुजली - गीली खुजली में 10 ग्राम सुहागा पिसा हुआ, 100 ग्राम चारोली, 10 ग्राम गुलाब जल इन तीनों को साथ में पीसकर इसका पतला लेप तैयार करें और खुजली वाले सभी स्थानों पर लगाते रहें। ऐसा करीबन 4-5 दिन करें। इससे खुजली में काफी आराम मिलेगा।
- चेहरे पर लेप- चारोली को गुलाब जल के साथ सिलबट्टे पर महीन पीस कर लेप तैयार कर चेहरे पर लगाएँ। लेप जब सूखने लगे तब उसे अच्छी तरह मसलें और बाद में चेहरा धो लें। इससे चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार हो जाएगा। इसे एक सप्ताह तक हर रोज प्रयोग में लाए। बाद में सप्ताह में दो बार लगाते रहें।
- ददोड़े/शीत पित्ती- शरीर पर शीत पित्ती के ददोड़े या फुंसियाँ होने पर दिन में एक बार 20 ग्राम चिरौंजी को खूब चबा कर खाएँ। साथ ही दूध में चारोली को पीसकर इसका लेप करें। इससे बहुत फायदा होगा। यह नुस्खा शीत पित्ती में बहुत उपयोगी है।
- चारोली का तेल बालों को काला करने के लिए उपयोगी है।
- 5-10 ग्राम चारोली को पीसकर दूध के साथ लेने से रक्तातिसार (खूनी दस्त) में लाभ होता है।
- खांसी में चिरौंजी का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।
- छठवें महीने के गर्भाशय के रोग: चिरौंजी, मुनक्का और धान की खीलों का सत्तू, ठण्डे पानी में मिलाकर गर्भवती स्त्री को पिलाने से गर्भ का दर्द, गर्भस्राव आदि रोगों का निवारण हो जाता है।

Friday, November 22, 2013

सरसों का तेल

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर
ठंड में सरसों का तेल ऐसे उपयोग करेंगे तो इन प्रॉब्लम्स की छुट्टी हो जाएगी
 सर्दियों में सरसों के तेल का उपयोग खाने में करें या दवा के रूप में यह बहुत फायदेमंद साबित होता है। सरसों तेल में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो ऐसे पोषक तत्व हैं जो हमारी सेहत, बाल और त्वचा आदि पर जादुई असर छोड़ते हैं। इसलिए सरसों के तेल का उपयोग प्राचीन समय से ही खाने व शरीर पर लगाने में भी किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सरसों का तेल बहुत ही अच्छे पेनकिलर की तरह भी काम करता है।
 - सरसों के तेल में दर्दनाशक गुण हैं, यदि कान का दर्द सताए तो दो बूंद गुनगुना सरसों का तेल कान में टपकाएं, चाहे तो इसमें दो चार कलियां लहसुन की भी मिला सकते हैं। 
-  सरसों का तेल सौंदर्यवर्धक भी है, रूप सौंदर्य निखारने के लिए गौरा रंग चाहने वाले बेसन हल्दी में सरसो का तेल डालकर लगाएं।
-  सरसों का तेल दिल को चुस्त-दुरुस्त रखता है, कुछ समय पूर्व एम्स, हावर्ड स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस तथा सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज में एक साथ शोध की गई जिससे पता चला कि सरसों का तेल खाने वाले 71 प्रतिशत लोगों को दिल की बीमारी नहीं हुई।
- यदि कमर दर्द हो तो सरसों के तेल में थोड़ी हींग, अजवाइन और लहसुन मिलाकर गर्म कर लें और उसे कमर पर लगाएं, पिंडलियों का दर्द हो तो सरसो के तेल को गुनगुना करके मालिश करना चाहिए।
- यदि गठिया से परेशान हों तो सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से दर्द में राहत मिलती है।

- चर्मरोगों में भी सरसों का तेल लाभदाक है इसके तेल में आक पत्तों का रस और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर गर्म करके ठंडा होने पर लगाने से दाद, खाज, खुजली आदि नाश होता है। सरसों का तेल पाइरिया मिटाने वाला है। इसमें सेंधा नमक मिलाकर दांतों और मसूड़ों पर लगाना चाहिए। 
- यदि चेहरे पर कील मुंहासे, झाइयां, झुर्रियां हो तो सरसों का तेल बड़े काम की चीज है सरसों के तेल से मालिश करने से शरीर पर झुर्रियां नहीं पड़ती।
 - सरसों के तेल में थोड़ा हिना पाउडर मिलाकर कुछ देर उबालकर छानकर बालों में लगाने से बाल झडऩा कम हो जाते हैं।
- सरसों के तेल से मालिश करने पर खून बढ़ता है। शरीर में चुस्ती-स्फूर्ति आती है। इससे शारीरिक थकान भी दूर होती है। 

Monday, November 11, 2013

जिंदगी की बच्चों के नाम

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

लाखों की नौकरी छोड़ पति-पत्नी ने जिंदगी की बच्चों के नाम
जमशेदपुर. बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लाखों की नौकरी छोड़ कोई गांव के बच्चों को पढ़ाने का फैसला ले, तो इसे कॅरियर के प्रति जोखिम मोल लेना ही कहा जाएगा। लेकिन, शहर की इंजीनियर दंपती अनुराग जैन और शिखा जैन ने इसकी परवाह नहीं की और निकल पड़े गांव की ओर शिक्षा का अलख जगाने।
उन्हें घर और समाज का विरोध भी झेलना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने ग्रामीण बच्चों की जिंदगी में शिक्षा की रोशनी फैलाने के फैसले को नहीं बदला। उन्होंने गोविंदपुर में नीव (न्यू एजुकेशन एंड इनवायरमेंट विजन) नाम से स्कूल खोला, जहां 150 से ज्यादा बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। यहां पर गोविंदपुर के अलावा सरजामदा, गरूड़बासा और हुरलुंग जैसे क्षेत्र के बच्चों को इंजीनियर दंपती अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दे रहे हैं।  
संक्षिप्त परिचय
नाम : अनुराग जैन व शिखा जैन
निवासी :  रिवर व्यू इनक्लेव टेल्को
शिक्षा : वर्ष 97 में रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, कुरुक्षेत्र से बीटेक (दोनों ने ली डिग्री)
नौकरी : अनुराग एलएंडटी और शिखा मेटाफोर ग्लोबल सोल्यूशन (बाद में छोड़ दी नौकरी)
कहां पढ़ाते हैं : गोविंदपुर, सरजामदा, गरूड़बासा और हुरलुंग ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को दे रहे शिक्षा
संघर्ष
चेन्नई के स्कूल में पढ़ाया 
अनुराग ने स्कूली शिक्षा लिटिल फ्लावर स्कूल, जमशेदपुर से पूरी की। वर्ष 1997 में रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग की है। शिखा और अनुराग यहां बैचमेट थे। डिग्री लेने के बाद एलएंडटी में अनुराग और शिखा की नौकरी मेटाफोर ग्लोबल सोल्यूशन में लग गई। ]
लेकिन, जल्द ही नौकरी से उनका मन भर गया और वे बेचैन रहने लगे। एक दिन उन्होंने नौकरी छोड़ दी और कृष्णमूर्ति फाउंडेशन के बैनर तले चेन्नई में चलने वाले स्कूल में पढ़ाने लगे। अनुराग के मुताबिक, नौकरी छोडऩे के बाद काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान पत्नी शिखा का काफी सपोर्ट रहा। उन्होंने हमेशा हौसला बढ़ाया और अच्छे-बुरे वक्त में साथ दिया।
सीख
शिक्षा ही बदलाव का जरिया
अनुराग कहते हैं कि चेन्नई में बच्चों को पढ़ाने के दौरान उनके व्यक्तित्व में बदलाव आया। यहां से कुछ दिनों के लिए वे आंध्र प्रदेश के एक गांव में गए और ऑर्गेनिक फार्मिंग की। वहां उन्हें महसूस हुआ कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, दूसरों को अच्छी जिंदगी देने की पहल कम लोग ही करते हैं। उन्हें लगा कि इसके लिए गांव में बदलाव जरूरी है और शिक्षा की रोशनी ही एकमात्र जरिया है, जो किसी का मौलिक रूपांतरण (फंडामेंटल ट्रांसफॉर्मेशन) कर सकता है। इसके बाद वे जमशेदपुर आ गए और नीव स्कूल की स्थापना की। इसके पहले कुछ समय तक केपीएस, एनएमएल में भी काम किया।
प्रयास
कैसे चलाते हैं स्कूल
अनुराग ने बताया कि उनके दोस्तों के अलावा देश-दुनिया में काम करने वाले भारतीय गांव के गरीब बच्चों को स्पांसर करते हैं। नीव में रूरल किड्स स्पांसरशिप प्रोग्राम के तहत 150 बच्चों में से 80 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा जेवियर लेबर रिलेशंस इन्स्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) के छात्र समय-समय पर बच्चों को मोटिवेशन और कॅरियर काउंसिलिंग करते हैं। स्कूल के बच्चे भी एक्सएलआरआई विजिट करते हैं, ताकि उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहन मिले।

Sunday, November 10, 2013

शरद बाबू

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

चेन्नई की गलियों में इडली और दोसा बेच प्रतिदिन 20 रुपए कमाने वाली शरद बाबू की मां ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उनका बेटा हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगा। शरद बाबू ने बुलंद हौसले की बदौलत अपनी तकदीर की कहानी खुद लिखी और हजारों परिवार के चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेरी।
आज वे अहमदाबाद स्थित फूड किंग केटरिंग सर्विसेज लिमिटेड के मालिक हैं। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स) पिलानी से मेकेनिकल इंजीनियरिंग और आईआईएम (मुंबई) से एमबीए करने वाले शरद बाबू 15 नवंबर को शहर आ रहे हैं। वे एक्सएलआरआई में शुरू होने जा रहे मैनेजमेंट फेस्ट ऑन्सम्बल-2013 में देश के बिजनेस स्कूलों के विद्यार्थियों को बिजनेस के गुर बताएंगे।
मां कमाती थी प्रतिदिन 20 रुपए, बेटे ने ठुकराया लाखों का पेकैज औऱ बना फूड किंग





लाखों का पैकेज ठुकरा शुरू की अपनी कंपनी
शरद बाबू ने लाखों रुपए के पैकेज को ठुकराकर 200६ में मात्र दो हजार रुपए में अपनी कंपनी फूड किंग शुरू की। आज उनकी कंपनी में 1000 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं। दलित परिवार से संबंध रखने वाले शरद बाबू कहते हैं कि उनकी कोशिश समाज के सबसे निचले तबके को एक सम्मानजनक स्थान दिलाना है। इसके लिए नौकरी नहीं, उनके लिए रोजगार का सृजन करना होगा।
कौन हैं शरद बाबू : शरद बाबू का जन्म चेन्नई के मनीपक्कम गांव में हुआ था। पति की मौत के बाद उनकी मां ने इडली-दोसा बेच उन्हें स्कूल भेजा। पढ़ाई में मेधावी रहे शरद बाबू को बिट्स पिलानी में दाखिला मिला। इसके बाद उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया। आज वे फूड किंग केटरिंग सर्विसेज के सीईओ हैं।
शरद बाबू एक मिसाल हैं उन युवाओं के लिए, जो नौकरी और पैसे के पीछे भागने की बजाय समाज में चेंज एजेंट बनना चाहते हैं। शरद चाहते, तो किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी कर लाखों रुपए कमा सकते थे, मगर उन्होंने अपनी कंपनी बनाकर दूसरे के लिए रोजगार सृजन करने की कोशिश की। आज वे देश के हर बिजनेस स्कूल में केस स्टडीज के रूप में अध्ययन किए जाते हैं। प्रो. मधुकर शुक्ला, एक्सएलआरआई
शायद ही कोई हो, जो शरद बाबू की सफलता की स्टोरी को उनकी अपनी जुबां से सुनना नहीं चाहेगा। एक्सएलआरआई समेत देश के बिजनेस स्कूल के छात्रों के लिए यह एक ऐसा अवसर है, जहां वे खुद की कंपनी खड़ा करने के गुर जानेंगे।
ए. स्वामी, सेक्रेटरी, ऑन्सम्बल-2013

Tuesday, November 5, 2013

अजवाइन

रोजाना थोड़ी सी अजवाइन खाने से इन रोगों के लिए दवा नहीं खानी पड़ेगी
अजवाइन का  प्रयोग तड़के, पकौड़े से लेकर बेकरी में बनने वाले नमकीन तक में  किया जाता है। भारतीय खाने में सदियों से उपयोग की जा रही अजवाइन सिर्फ एक मसाला नहीं है।  यह कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर है। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन पाचन को दुरुस्त रखती है। यह कफ, पेट तथा छाती का दर्द और कृमि रोग में फायदेमंद होती है। साथ ही हिचकी, जी मचलाना, डकार, बदहजमी, मूत्र का रुकना और पथरी आदि बीमारी में भी लाभप्रद होती है। अजवाइन के कई ऐसे घरेलू प्रयोग हैं, जो हेल्थ प्रॉब्लम्स में रामबाण की तरह कार्य करते हैं तो आइए आज हम आपको बताते हैं अजवाइन के ऐसे ही कुछ औषधीय गुणों के बारे में....

- रोजाना थोड़ी सी अजवाइन खाएंगे तो अर्जीण, कब्ज व गैस जैसी बीमारियां परेशान नहीं करेंगी। 
- सर्दी, गर्मी के प्रभाव के कारण जिन लोगों गला बैठ जाता है। उन्हें बेर के पत्ते और अजवाइन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने चाहिए।
- एसिडिटी की तकलीफ  है तो समान मात्रा में लेकर अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इस मिश्रण को पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।
- मुंह से दुर्गंध आने पर अजवाइन को पानी में उबालकर रख लें। इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती हैं। 
-2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें। चेहरा चमकने लगेगा।
- अजवाइन को भून व पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण से मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
- पैर में कांटा चुभ जाए, तो कांटा चुभने के स्थान पर पिघले हुए गुड़ में 10 ग्राम अजवाइन मिलाकर थोड़ा गर्म कर बांध देने से कांटा अपने आप निकल जाएगा। 
- कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है। घाव और जले हुए स्थानों पर भी अजवाइन का लेप करने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं।
- सरसों के तेल में अजवाइन डालकर अच्छी तरह गर्म करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। 
- दाद की समस्या होने पर गर्म पानी में अजवाइन पीसकर लेप करें। दाद एक सप्ताह में ठीक हो जाएगा।