This blog is designed to motivate people, raise community issues and help them. लोगों को उत्साहित करना, समाज की ज़रुरतों एवं सहायता के लिए प्रतिबद्ध
Sunday, May 3, 2009
Saturday, May 2, 2009
Friday, May 1, 2009
उम्र नब्बे साल, करते हैं हाथी की सवारी
प्रस्तुति दिनेश कुमार कसेरा।
गोरखपुर [सहजनवां], रामसमुझ शुक्ल 90 साल के युवा हैं। उनके लिए यही कहना ज्यादा मुनासिब होगा। इस उम्र में भी उन्हें हाथी की सवारी का शौक है। शादी विवाह का न्योता करने वह हाथी पर ही चढ़कर जाते है। उनका जज्बा बेजोड़ है। उन्होंने इलाके में एलान कर रखा है कि कोई उनसे पंजा लड़ाकर पराजित करे तो एक लाख रुपया इनाम देंगे। वे कहते है बुढ़ापा क्या है अभी तो उनके जीवन का बसंत शुरू हुआ है।
गोरखपुर के सहजनवां तहसील के महिउद्दीनपुर उर्फ तख्ता निवासी रामसमुझ का 35 सदस्यों वाला भरा पूरा परिवार है। उनके तीन बेटे हैं। जिनमें रामकृपाल शुक्ल 72 वर्ष, अछैबरनाथ शुक्ल 68 वर्ष व वृजेन्द्रनाथ शुक्ल 64 वर्ष के हो चुके हैं। उनकी आंखें बगैर चश्मा सबकुछ देख लेती हैं। आवाज खनकती हुई कड़क। सात नाती ,आठ पनाती तथा उनके परिवार के लोग उन्हे ही अपना मुखिया मानते है। बकौल रामसमुझ जवानी के दिनों में पहलवानी करते थे और लाठी भांजने के शौकीन रहे। वे कहते हैं मरते दम तक मेहनत करना नहीं छोड़ेंगे। मजदूरों के साथ खेत में काम करने के साथ-साथ ट्रैक्टर से बाजार करने सहजनवां जाते है। दरवाजे पर हाथी रखने और उसकी पूजा करने का उनका शौक देखने लायक है। छपरा से दो माह पूर्व एक हथिनी लेकर आए है जिसका नाम उन्होंने पवन कली रखा है। रामसमुझ गांव और आसपास के गांवों में अपनी पवनकली पर सवारी कर न्यौता करने जाते है।
दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास से भरे रामसमुझ साल में तीन-चार बार धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन करते है। वह रोजाना अपने परिवार के बच्चों व महिलाओं के साथ खेतीबारी के बाद कीर्तन कर समय बिताते है। जीतोड़ मेहनत के आदी रामसमुझ अपनी डेढ़ सौ बीघा की खेती की देखभाल खुद करते हैं। उन्हें दिन के वक्त मजदूरों के साथ कुदाल चलाते अक्सर देखा जा सकता है।
गोरखपुर [सहजनवां], रामसमुझ शुक्ल 90 साल के युवा हैं। उनके लिए यही कहना ज्यादा मुनासिब होगा। इस उम्र में भी उन्हें हाथी की सवारी का शौक है। शादी विवाह का न्योता करने वह हाथी पर ही चढ़कर जाते है। उनका जज्बा बेजोड़ है। उन्होंने इलाके में एलान कर रखा है कि कोई उनसे पंजा लड़ाकर पराजित करे तो एक लाख रुपया इनाम देंगे। वे कहते है बुढ़ापा क्या है अभी तो उनके जीवन का बसंत शुरू हुआ है।
गोरखपुर के सहजनवां तहसील के महिउद्दीनपुर उर्फ तख्ता निवासी रामसमुझ का 35 सदस्यों वाला भरा पूरा परिवार है। उनके तीन बेटे हैं। जिनमें रामकृपाल शुक्ल 72 वर्ष, अछैबरनाथ शुक्ल 68 वर्ष व वृजेन्द्रनाथ शुक्ल 64 वर्ष के हो चुके हैं। उनकी आंखें बगैर चश्मा सबकुछ देख लेती हैं। आवाज खनकती हुई कड़क। सात नाती ,आठ पनाती तथा उनके परिवार के लोग उन्हे ही अपना मुखिया मानते है। बकौल रामसमुझ जवानी के दिनों में पहलवानी करते थे और लाठी भांजने के शौकीन रहे। वे कहते हैं मरते दम तक मेहनत करना नहीं छोड़ेंगे। मजदूरों के साथ खेत में काम करने के साथ-साथ ट्रैक्टर से बाजार करने सहजनवां जाते है। दरवाजे पर हाथी रखने और उसकी पूजा करने का उनका शौक देखने लायक है। छपरा से दो माह पूर्व एक हथिनी लेकर आए है जिसका नाम उन्होंने पवन कली रखा है। रामसमुझ गांव और आसपास के गांवों में अपनी पवनकली पर सवारी कर न्यौता करने जाते है।
दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास से भरे रामसमुझ साल में तीन-चार बार धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन करते है। वह रोजाना अपने परिवार के बच्चों व महिलाओं के साथ खेतीबारी के बाद कीर्तन कर समय बिताते है। जीतोड़ मेहनत के आदी रामसमुझ अपनी डेढ़ सौ बीघा की खेती की देखभाल खुद करते हैं। उन्हें दिन के वक्त मजदूरों के साथ कुदाल चलाते अक्सर देखा जा सकता है।
Sunday, April 26, 2009
पलक झपकते छप जाएगी किताब
किताब लिखना जितना श्रमसाध्य काम है उसे छपवाना और भी मुश्किल। प्रकाशक ढूंढते-ढूंढते नए लेखकों की चप्पलें तक घिस जाती हैं। ऊपर से उन्हें प्रकाशकों की तमाम गलत शर्ते भी माननी पड़ती है। लेकिन अब लेखकों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं।
मशहूर बुक चेन ब्लैकवेल ने पांच मिनट में किताब छापने वाली 'एस्प्रेसो बुक मशीन' [ईबीएम] लांच की है। यह मशीन एक मिनट में 105 पेज छाप सकती है। ब्लैकवेल ने यह योजना कुछ खास वजहों से लांच की है। लोग उसके स्टोर पर किताबें खरीदने आते हैं। पसंद की किताब स्टाक में उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मशीन कंप्यूटर डाटाबेस में मौजूद संस्करण को चंद मिनटों में छापकर आपको दे दी जाएगी। वह भी किताब की मूल कीमत में। यानी छपाई के पैसे भी आपको नहीं देने होंगे। उभरते हुए लेखकों के लिए तो यह मशीन किसी वरदान से कम नहीं। उन्हें प्रकाशकों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं रह जाएगी। उन्हें बस अपनी लिखी किताब को सीडी में लोड करना होगा और किताब मिनटों में छपकर तैयार। यदि योजना सफल रहती है तो मशीन पूरे ब्रिटेन में लगाई जाएगी। ब्लैकवेल का दावा है कि वह लोगों की जरूरत को पूरा करने के लिए अपना डाटाबेस बढ़ा रहा है। पहले चार लाख किताबें डाउनलोड की जाएंगी। उम्मीद है कि गर्मियां खत्म होते-होते यह आंकड़ा 10 लाख पार कर जाएगा।
मशहूर बुक चेन ब्लैकवेल ने पांच मिनट में किताब छापने वाली 'एस्प्रेसो बुक मशीन' [ईबीएम] लांच की है। यह मशीन एक मिनट में 105 पेज छाप सकती है। ब्लैकवेल ने यह योजना कुछ खास वजहों से लांच की है। लोग उसके स्टोर पर किताबें खरीदने आते हैं। पसंद की किताब स्टाक में उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मशीन कंप्यूटर डाटाबेस में मौजूद संस्करण को चंद मिनटों में छापकर आपको दे दी जाएगी। वह भी किताब की मूल कीमत में। यानी छपाई के पैसे भी आपको नहीं देने होंगे। उभरते हुए लेखकों के लिए तो यह मशीन किसी वरदान से कम नहीं। उन्हें प्रकाशकों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं रह जाएगी। उन्हें बस अपनी लिखी किताब को सीडी में लोड करना होगा और किताब मिनटों में छपकर तैयार। यदि योजना सफल रहती है तो मशीन पूरे ब्रिटेन में लगाई जाएगी। ब्लैकवेल का दावा है कि वह लोगों की जरूरत को पूरा करने के लिए अपना डाटाबेस बढ़ा रहा है। पहले चार लाख किताबें डाउनलोड की जाएंगी। उम्मीद है कि गर्मियां खत्म होते-होते यह आंकड़ा 10 लाख पार कर जाएगा।
Saturday, April 18, 2009
Saturday, April 11, 2009
सफलता के पांच अचूक मंत्र
प्रस्तुति : नवभारत टाइम्स
लक्ष्य निर्धारित करना है, तो बड़ा करें। आपका लक्ष्य जितना बड़ा होगा। आपके काम करने का दायरा भी उसी के अनुसार व्यापक होता जाएगा। किसी ने सच ही कहा है कि सूर्य को पाने की चाहत रखोगे तो सूर्य ना मिले, पर चांद-सितारे तो मिल ही जाएंगे। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि बड़ी सफलता केलिए हमारा लक्ष्य भी बड़ा होना चाहिए। कुछ ऐसे तरीके हैं, जिन्हें अपनाने के बाद कठिन से कठिन मंजिल भी आसान लगती है। जरूरत है केवल कोशिशों को लगातार जारी रखने की। आइये देखें सक्सेस के पांच सटीक मंत्र कौन-कौन से हैं।
पहली बात
आपने जो भी लक्ष्य देखा है, उसे कागज पर लिखकर दीवार पर चिपका दें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ये आपके ख्वाब हैं या फिर आपकी सोच। इन्हें हमेशा अपने सामने रखें। हां, यह जरूर ध्यान रखें कि लक्ष्य अर्थपूर्ण होने के साथ ही ऐसा भी हो, जिसे पूर्ण किया जा सके। इसका एक अन्य लाभ भी है। आपका मन कभी भी रास्ते से नहीं भटकेगा। वैसे, आप इस तरह के उपाय हर दिन के कार्य के लिए भी कर सकते हैं।
दूसरी बात
कहते हैं कि स्वस्थ तन से ही स्वस्थ मन होता है। इसलिए अपने स्वास्थ्य पर अवश्य ध्यान दें। इसके लिए ना ही आपको अधिक परेशान होने की जरूरत है और ना ही कई दिनों तक उपवास रखने की। ध्यान केवल यह रखना है कि हर दिन की दिनचर्या आपने लिख ली है। इसमें आपने क्या घर में खाया? क्या खरीद कर खाया? दोस्तों ने कितना खिलाया या चाय पिलाया। इस नियम को अपनाने से आप अनहेल्दी फूड की ओर नहीं झुकेंगे और आपकी स्वास्थ्य भी ठीक रहेगी।
तीसरी बात
आपके पास दो तरह के लक्ष्य होते हैं। एक तो हर दिन का छोटा काम, जिन्हें आप उसी दिन पूर्ण करते हैं। दूसरा, बड़ा लक्ष्य, जिसे पूर्ण करने के प्रयास आपको लगातार करने होते हैं। इसलिए आपकी कोशिश यह होनी चाहिए कि आपका हर काम आपके जीवन के मुख्य लक्ष्य की ओर ही ले जाए। अगर ऐसा नहीं है, तो आपको योजना पर विचार करने की जरूरत है। जब आप खाली हों, तो इस पर अवश्य विचार करें कि आपने मूल लक्ष्य को पाने का कितना प्रयास किया।
चौथी बात
अंग्रेजी में कहा गया है कि यू कांट गो इन पास्ट, बट यू केन मेक योर फ्यूचर। इसलिए पिछली विफलताओं पर पछताने से कोई फायदा नहीं होता। हां, उनसे सीख जरूर ले सकते हैं। आप यह सोचकर दुखी ना हों कि आज जिस स्थिति में हैं, वहां आपको नहीं होना चाहिए था। पीछे की दुर्घटना, उदासी के पल या दुर्भाग्य के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। केवल नई-नई बातों, यादों, अनुभवों और खुशियों के लिए ही जगह रखें।
पांचवी बात
अक्सर लोग अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हैं। अपनी कुछ गलतियों पर हंसते हैं और दुखी भी होते हैं। ऐसे में बातों से बाहर निकलने की जरूरत है। सच्चाई यह है कि हम अपनी जिंदगी में कई भूल करते हैं, जिन्हें याद कर हम अपना काफी समय पछतावा में ही गंवा देते हैं। पर इन सब बातों के बीच याद रखने वाली चीज यह है कि जिन लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में विजय पाई, उनका तरीका क्या था?
लक्ष्य निर्धारित करना है, तो बड़ा करें। आपका लक्ष्य जितना बड़ा होगा। आपके काम करने का दायरा भी उसी के अनुसार व्यापक होता जाएगा। किसी ने सच ही कहा है कि सूर्य को पाने की चाहत रखोगे तो सूर्य ना मिले, पर चांद-सितारे तो मिल ही जाएंगे। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि बड़ी सफलता केलिए हमारा लक्ष्य भी बड़ा होना चाहिए। कुछ ऐसे तरीके हैं, जिन्हें अपनाने के बाद कठिन से कठिन मंजिल भी आसान लगती है। जरूरत है केवल कोशिशों को लगातार जारी रखने की। आइये देखें सक्सेस के पांच सटीक मंत्र कौन-कौन से हैं।
पहली बात
आपने जो भी लक्ष्य देखा है, उसे कागज पर लिखकर दीवार पर चिपका दें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ये आपके ख्वाब हैं या फिर आपकी सोच। इन्हें हमेशा अपने सामने रखें। हां, यह जरूर ध्यान रखें कि लक्ष्य अर्थपूर्ण होने के साथ ही ऐसा भी हो, जिसे पूर्ण किया जा सके। इसका एक अन्य लाभ भी है। आपका मन कभी भी रास्ते से नहीं भटकेगा। वैसे, आप इस तरह के उपाय हर दिन के कार्य के लिए भी कर सकते हैं।
दूसरी बात
कहते हैं कि स्वस्थ तन से ही स्वस्थ मन होता है। इसलिए अपने स्वास्थ्य पर अवश्य ध्यान दें। इसके लिए ना ही आपको अधिक परेशान होने की जरूरत है और ना ही कई दिनों तक उपवास रखने की। ध्यान केवल यह रखना है कि हर दिन की दिनचर्या आपने लिख ली है। इसमें आपने क्या घर में खाया? क्या खरीद कर खाया? दोस्तों ने कितना खिलाया या चाय पिलाया। इस नियम को अपनाने से आप अनहेल्दी फूड की ओर नहीं झुकेंगे और आपकी स्वास्थ्य भी ठीक रहेगी।
तीसरी बात
आपके पास दो तरह के लक्ष्य होते हैं। एक तो हर दिन का छोटा काम, जिन्हें आप उसी दिन पूर्ण करते हैं। दूसरा, बड़ा लक्ष्य, जिसे पूर्ण करने के प्रयास आपको लगातार करने होते हैं। इसलिए आपकी कोशिश यह होनी चाहिए कि आपका हर काम आपके जीवन के मुख्य लक्ष्य की ओर ही ले जाए। अगर ऐसा नहीं है, तो आपको योजना पर विचार करने की जरूरत है। जब आप खाली हों, तो इस पर अवश्य विचार करें कि आपने मूल लक्ष्य को पाने का कितना प्रयास किया।
चौथी बात
अंग्रेजी में कहा गया है कि यू कांट गो इन पास्ट, बट यू केन मेक योर फ्यूचर। इसलिए पिछली विफलताओं पर पछताने से कोई फायदा नहीं होता। हां, उनसे सीख जरूर ले सकते हैं। आप यह सोचकर दुखी ना हों कि आज जिस स्थिति में हैं, वहां आपको नहीं होना चाहिए था। पीछे की दुर्घटना, उदासी के पल या दुर्भाग्य के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। केवल नई-नई बातों, यादों, अनुभवों और खुशियों के लिए ही जगह रखें।
पांचवी बात
अक्सर लोग अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हैं। अपनी कुछ गलतियों पर हंसते हैं और दुखी भी होते हैं। ऐसे में बातों से बाहर निकलने की जरूरत है। सच्चाई यह है कि हम अपनी जिंदगी में कई भूल करते हैं, जिन्हें याद कर हम अपना काफी समय पछतावा में ही गंवा देते हैं। पर इन सब बातों के बीच याद रखने वाली चीज यह है कि जिन लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में विजय पाई, उनका तरीका क्या था?
Wednesday, April 8, 2009
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