Saturday, March 14, 2009

हक के लिए जाग रहे लोग

प्रस्तुति - भास्कर

छत्तीसगढ़ के जिला व राज्य उपभोक्ता फोरम में दर्ज सैकड़ों आवेदन व उनके निराकरण के आंकड़ों को देखने के बाद यही महसूस होता है। लोग अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रहे हैं। दुकानदार के किसी भी तरह का छल बर्दाश्त करने के बजाय वे उसे सीधे फोरम में चुनौती देना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। 15 मार्च को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर सिटी भास्कर की खास रिपोर्ट।
अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं

गुडियारी की प्रीति शुक्ला ने अपने हक के लिए रेलवे विभाग को भी झंकझोर दिया। 13 सितंबर 2006 को काम के सिलसिले में प्रीति रायपुर से पूना के लिए आजाद हिंद एक्सप्रेस से कोच नंबर एस-3 में सफर कर रही थीं। नागपुर में उनका सूटकेस ट्रेन से चोरी हो गया। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर अनाधिकृत व्यक्तियों को आरक्षित कोच में प्रवेश रोकने में ढिलाई का आरोप लगाते हुए रेलवे प्रशासन के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम में अपील दायर की। जिला उपभोक्ता फोरम ने इसे रेलवे की लापरवाही बताते हुए क्षतिपूर्ति के तौर पर प्रीति को 7 हजार रुपए, मानसिक प्रताड़ना के लिए 2 हजार और 2 हजार केस खर्च के तथा सभी राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज समेत क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
जिला उपभोक्ता फोरम के फैसले को चुनौती देते हुए रेलवे प्रशासन ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में यह तर्क देते हुए फैसला रद्द करने की अपील की कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा रेलवे का है न कि सामानों का। लेकिन राज्य आयोग ने भी इस मामले में रेलवे प्रशासन की लापरवाही पाई, जिससे प्रीति की जीत हुई। केस के दो साल बाद फिर आयोग का फैसला आया कि प्रीति को क्षतिपूर्ति दी जाए।
बीएसएनएल की खोली पोल

अमरदीप टाकीज रोड निवासी रमेश वल्र्यानी ने विभाग में घर के लैंडलाइन फोन खराब होने के बाद बंद होने की शिकायत की। शिकायत के दस दिन बाद भी फोन ठीक न होने पर उन्होंने बीएसएनएल कर्मचारियों के लापरवाही के कारण कारोबार प्रभावित होने व नुकसान होने की शिकायत 18-08-06 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम में दायर की। 13-08-07 को जिला फोरम ने रमेश के पक्ष को गलत ठहराते हुए फोन फाल्ट केवल एक दिन का बताया। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में अपील की। 11-02-09 को राज्य आयोग ने रमेश के पक्ष में निर्णय जारी करते हुए ढाई हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश जारी किया।
धोखाधड़ी को मुंहतोड़ जवाब

अमलीडीह निवासी एस. बालाकृष्णा राव ने संजीवनी हाउसिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा अपना घर योजना के तहत एक घर खरीदने 40 हजार रुपए दिए, लेकिन न तो उन्हें घर मिला और न ही किसी प्रकार के दस्तावेज। मामला धोखाधड़ी का देखते हुए उन्होंने कंपनी के विरुद्ध जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम में 30-04-07 को मामला दायर किया।
मामले की सुनवाई करते हुए जिला फोरम ने 3 जुलाई 2008 को श्री राव के पक्ष में निर्णय देते हुए कंपनी से उनके 40 हजार रुपए वापस करने के आदेश जारी किए। उक्त कंपनी ने जिला फोरम के आदेश के विरुद्ध राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में गुहार लगाई पर वहां भी आयोग ने 21 जनवरी 2009 को जिला न्यायालय के आदेश को स्थिर रखते हुए 40 हजार रुपए वापस करने तथा परिपक्व तारीख से अदायगी तारीख तक 9 प्रतिशत सालाना व्याज व 1500 रुपए दोनो न्यायालयों के खर्च को भी देने का आदेश जारी किया।
महंगा पड़ा देर से डिलीवरी करना

पंचशीलनगर निवासी नंदलाल वल्र्यानी ने 20 जुलाई 2006 को जीईरोड स्थित एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से एक स्कूटर बुक की। उक्त कंपनी द्वारा 20 दिन के भीतर स्कूटर की डिलीवरी न करने से परेशान नंदलाल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम में हर्जाने की अपील की। फोरम ने डिलीवरी में लापरवाही पाते हुए कंपनी को फटकार लगाते हुए 27 फरवरी 2008 को आदेश जारी करते हुए 1 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति व 500 रुपए केस खर्च दिए जाने का फैसला दिया।
एक रास्ता यह भी
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम और राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में हार चुकी पार्टी धारा 21 ब के अंतर्गत राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, नई दिल्ली, जनपद भवन, पुरानी इंडियन आयल भवन, पांचवी तल, नई दिल्ली 110001 में अपनी अपील दायर कर सकते हैं।

कैसे करें अपील
:पूरी शिकायत शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करें।

:संबंधित दस्तावेज साथ में संलग्न करें।

:20 लाख तक के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम में शिकायत दर्ज की जाती है।

:20 लाख से एक करोड़ तक के लिए राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में और एक करोड़ से अधिक के मामलों को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, नई दिल्ली में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अच्छी पोस्ट है, आप से पहले ब्लागवाणी पर आई मुसाफिर जाट की पोस्ट "रजाई गददे भी बन गए घुमक्कड़" पढ़ कर उन्हें आप की यह पोस्ट पढ़ने की सलाह दे आया हूँ।

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

इम्प्रेसिव!

संगीता पुरी said...

जगना ही चाहिए ... कितने दिन सोए रहेंगे हमलोग आखिर ?