Sunday, August 2, 2009

धर्मपुत्र?

प्रस्तुति - भास्कर

उदयपुर. शहर में धर्मपुत्र ऐसे बुजुर्र्गो की सेवा कर रहे हैं, जिनके बेटे कमाने के लिए उदयपुर से बाहर गए हैं और बेटियां ससुराल चली गई हैं। यह सेवा नि:शुल्क नहीं है। बुजुर्ग की सेवा के अलावा धर्मपुत्र किसी के भी घर इमरजेंसी में दवाई पहुंचाने और इलाज मुहैया कराने का काम भी करते हैं। सामाजिक सुरक्षा के मद्देनजर यह सेवा यहां अकेले रहने वाले बुजुर्र्गो के बीच काफी पॉपुलर हो रही है।

यहां धर्मपुत्र संस्थान और राहत होम हेल्थ केयर संस्थान ने इस सेवा को शुरू किया है। राहत होम केयर के सीईओ सुरभित टांक का दावा है कि राज्य में इस प्रकार की सेवा सिर्फ उदयपुर में ही उपलब्ध है। अभी तक धर्मपुत्र पांच परिवारों की देखरेख में जुटे हुए हैं। धर्मपुत्र सेवा के अंतर्गत संस्थान द्वारा ऐसे ही परिवारों में अपने विश्वस्त प्रतिनिधि भेजे जाते हैं, जहां बुजुर्र्गो की शूश्रुषा करने वाला कोई नहीं होता। संस्थान का प्रतिनिधि, घर के सदस्य के साथ 24 घंटे रहता है और बुजुर्ग के शौच से लेकर आहार-उपचार का भी पूरा ख्याल रखता है।



क्या-क्या सेवा करते हैं धर्मपुत्र: बुजुर्ग या रोगी को मंजन, शौच निवृत्ति, मंदिर दर्शन, खेलना, बैड मैकिंग, डाइट तैयार करना, टीवी देखना, सायंकालीन भ्रमण, व्यायाम आदि कार्य धर्मपुत्र के जिम्मे होते हैं। आपात स्थिति में उन्हें अस्पताल ले जाने और तीमारदारी के साथ ही डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार दवाई देने जैसे कार्य भी करते हैं।

धर्मपुत्रों की सेवा लेने वालों ने कहा: बेदला निवासी प्रभाषचंद्र बीमार हैं और उनके परिवार के सभी सदस्य न्यूयॉर्क में रहते हैं। उनकी पुत्री छाया कहतीं हैं कि पापा को संभालने में हमें काफी परेशानी होती थी। हम इनका इलाज न्यूयॉर्क में भी करवा सकते हैं, लेकिन पापा तैयार नहीं हैं। ऐसे में हमने धर्मपुत्र सेवा का लाभ लिया।

-शास्त्री सर्कल निवासी कमला कोठारी पांव की हड्डी टूट जाने से तीन माह से बिस्तर पर है। सभी परिजन शिक्षा विभाग में नियुक्त होने के कारण घर पर वक्त नहीं दे पाते। उन्होंने भी धर्मपुत्र की सहायता ली।

सभी दृष्टिकोण पूरे होते हैं

डिप्टी लेबर कमिश्नर के पद से निवृत्त एनएन आसोपा कहते हैं कि मेरी बीवी शकुंतला आसोपा लंबे समय से बिस्तर पर है, मैं भी बुजुर्ग हूं। उनका ध्यान रखने में काफी समस्या होती है। धर्मपुत्र के सहयोग से हम दोनों ही सुखी हैं।

कौन है धर्मपुत्र?
धर्मपुत्र उक्त संस्थान के वे विश्वस्त प्रतिनिधि हैं जो बुजुर्ग रोगियों के साथ उनके पुत्र की तरह ही रहते हैं। संस्थान द्वारा इन सभी धर्मपुत्रों को अपनी जिम्मेदारी पर लगाया जाता है। उनका रिकार्ड, निवास स्थान आदि की जानकारी पुलिस में दी जाती है। इन धर्मपुत्रों को विशेष तौर पर दक्ष किया जाता है। बुजुर्र्गो की सार-संभाल, आपात स्थिति को संभालने का प्रशिक्षण दिया जाता है। अभी इन धर्मपुत्रों की संख्या 30 है और ये शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

1 comment:

Mired Mirage said...

बहुत सराहनीय प्रयास है।
घुघूती बासूती