Saturday, May 9, 2009

लंदन से प्यारा हमारा इंदौर


मेरा सपना था कि विदेश में अपना करियर बनाऊं। बचपन से लंदन जाने की इच्छा थी लेकिन इसके लिए मुझे काफी संघर्ष करने पड़ा। परिवार का सहयोग मिला तो आगे की पढ़ाई के लिए लंदन जाने की हिम्मत जुटा पाई।
वहां सबसे ज्यादा मुश्किल रहा पढ़ाई के पैटर्न को समझना इसके अलावा लैग्वेंज की प्रॉब्लम तो थी ही। लंदन में पढ़ाई का माहौल बिलकुल अलग था इसलिए शुरुआत काफी संघर्षो भरी रही। घर से पहली बार परदेश आई थी, होम सिकनेस होती थी। हमेशा घर याद आता था, ऐसे हालात में जॉब भी ढूंढ़ना था जो आसान नहीं था। सारी तकलीफों के बीच खुशी के पल वही थे जब घरवालों से कुछ देर बात कर लेती थी।
इसी तरह मेरा संघर्ष जारी रहा और बाहर रहना सीख गई। लंदन में कुछ महीने गुजारे तो देखा वहां के लोग भी हमारे जैसे ही हैं, सभी का हैल्पिंग नेचर देख मुझे वह देश भी अपने देश जैसा लगने लगा। फिर भी मेरा इंदौर तो लंदन से प्यारा है। पढ़ाई पूरी होने के बाद पापा-मम्मी ने मुझे वापस इंदौर आने के लिए कहा मगर इस बीच मुझे जॉब मिल गया। अब मैं हीथ्रो एयरपोर्ट में टेक्निकल इंजीनियर के पद पर जॉब कर रही हूं।
अब और आगे बढ़ना है, लंदन में रहते हुए जो आत्मविश्वास आया है वह आगे प्रोग्रेस करने में बहुत काम आएगा। इस कॉलम के माध्यम से कहना चाहती हूं कि अगर आपको बाहर नौकरी का अवसर मिले तो सिर्फ यह सोचकर न रुक जाएं कि अकेले कैसे काम करेंगे। जब तक आप सेफ जोन से बाहर नहीं आएंगे, संघर्ष करना नहीं सीख सकते। खुशबू फिलहाल इंदौर में ही है।
वैसे तो घर से निकलते ही विदेश चालू हो जाता है जहाँ अपनापन मिले वही देश, न मिले तो वही विदेश

3 comments:

संगीता पुरी said...

बिल्‍कुल सही कहा .. अच्‍छी लगी आपकी बात।

'उदय' said...

... प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!!!

राजेंद्र माहेश्वरी said...

यदि परिवर्तन से डरोगे तो तरक्की कैसे करोगे।

युग परिवर्तन की यह बेला आपको सपरिवार मंगलमय हो। शिव की शक्ति, मीरा की भक्ति, गणेश की सिद्धि, चाणक्य की बुद्धि, शारदा का ज्ञान, कर्ण का दान, राम की मर्यादा, भीष्म का वादा, हरिशचन्द्र की सत्यता, लक्ष्मी की अनुकम्पा, कुबेर की सम्पन्नता प्राप्त हो यही हमारी शुभकामना हैं।