Wednesday, May 20, 2009

मौसमी सब्जियां

सलाद के पत्ते : ये पत्ते विटामिन ए,सी,ई और पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम और दूसरे खनिज तत्वों से भरपूर होते है। सलाद के पत्ते जितने हरे होगें, उतने पोषक तत्वों से भरपूर होगें। सलाद की पत्तियां चुनते समय देख ले कि वे ताजी और कडक हों। उन पर लगी मिट्टी और कीडों को पानी से धो कर साफ किया जा सकता है। लेकिन जो पत्तियां मुरझायी हुई हो या पीली पड गयी हों, उन्हें ना लें। पनीर और दूसरी ताजी-कटी सब्जियों के साथ इन सलाद के पत्तों को मिला कर खाना स्वास्थ्यकारी होता है। कम कैलोरीवाले इस सलाद को खाने से चौगुना फायदा होता है।
खीरा : खीरे का इस्तेमाल सलाद के रूप में करते है। यह क्षारीय और खनिज तत्वों से भरपूर होता है। इसमें पोटेशियम होता है, जो हाइ ब्लड पे्रशर के शिकार लोगों का ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है। खीरा खाने से खूब पेशाब आता है। यह अल्सर के इलाज में प्रभावकारी है।
मूली : नेचुरोपैथ इसे बहुत उपयोगी मानते हैं। इसमें विटामिन सी, सोडियम और कैल्शियम होने की वजह से यह पीलिया या कमजोर लिवर के रोगियों को खाने के लिए दी जाती है। इसकी तीखी गंघ होती है। अगर सलाद बनाते समय सब्जियों के साथ इसके पत्तों को भी मिला कर लिया जाए, तो इसकी गंघ कम हो जाती है।
शिमला मिर्च : लाल और हरी शिमला मिर्च विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत हैं। सलाद बनाते समय इसे भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
करेला : सुबह खाली पेट 1 छोटा चम्मच कच्चे करेले का जूस लेने से ब्लड शुगर का स्तर तेजी से सामान्य हो जाती है। यह केवल डाइबिटीज से पीडित लोगों के लिए ही प्रभ्रावकारी नहीं हैं। चुंकि यह शरीर पर क्षारीय प्रभाव डालता है, इसलिए शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालता है। करेले में कॉपर, आयरन और पोटेशियम होता है। इसे खाने का सबसे अच्छा तरीका यह है इन्हें प्रेशर कुकर में स्टीम दिलवाएं और फिर इसमें भरावन भर कर प्याज के साथ भून कर खाएं।
भिंडी : यह सब्जी विश्वभर में पसंद की जाती है। इसमें पेक्टोस होने की वजह से यह क्षारीय होती है और जिलेटिन की वजह से एसिडिटी, अपच के शिकार लोगों को ठंडक पहुंचाती है। जिन लोगों को पेशाब से संबंघित समस्याएं होती है, उन्हें डॉक्टर खासतौर से भिंडी खाने की हिदायत देते है।
पोदीना : पोदीने की पत्तियां कच्ची खाने से शरीर की सफाई होती है व ठंडक मिलती है। यह बहुत ही गुणकारी होता है। ताजा पोदीना एंजाइम्स से भरपूर होता है। यह पाचन में सहायता करता है। अनियमित मासिकघर्म की शिकार महिला के शारीरिक चक्र में प्रभावकारी ढंग से संतुलन कायम करता है। यह भूख खोलने का काम करता है। पोदीने की चाय या पोदीने का अर्क लिवर के लिए अच्छा होता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में बहुत ही उपयोगी डिटॉक्सीफायर का काम करता है। मेंथॉल ऑइल पोदीने का ही अर्क है और दांतो से संबंघित समस्याओं को दूर करने में और क्लोरीन होती है। इसका सबसे बेहतर इस्तेमाल इसे घनिए की पत्तियो के साथ चटनी के रूप में खाना हैं। इसे घनिए की पत्ती, प्याज, काले नमक और काली मिर्च के साथ चटनी के रूप में खाना सबसे अच्छा होता है। चाहें, तो सलाद बनाने के बाद उसे पोदीने की पत्तियों से सजा कर खाएं।
मशरूम : चाइनीज काले मशरूम को खाने से टयूमर नहीं होता। यहां मिलने वाले मशरूम भी खनिज तत्वों से भरपूर होते है मशरूम खासतौर से उन लोगों को खाने के लिए दिये जाते हैं, जिनके लिपिड और कोलेस्ट्राल में असंतुलन होता है।
बैगंन : बैगंन में पोटेशियम, सल्फर, क्लोरीन, थोडा-बहुत आयरन और विटामिन सी होता है। जो लोग वायु विकार के शिकार होते है, उन्हें बैगन खाने चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार आर्थराइटिस के रोगियों को इस सब्जी के अलावा आलू- टमाटर से परहेज करना चाहिए। बैंगन खाने से कोलेस्ट्राल कम होता है और खट्टी डकारे भी दूर होती है।
मटर : इसमें सल्फर, फास्फोरस, क्लोरीन और पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है। मटर ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। यदि इसे अनाज और दालों के साथ खाया जाए, तो इसके बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। यदि केवल मटर को अघिक मात्रा में खाया जाए, तो यह पाचन के लिए अच्छा नहीं है। लिपिड को कम करने के लिए मटर एक अच्छी सब्जी है। इसे खाने से आवेरियन कैंसर नहीं होता।
सीताफल : यह खनिज तत्वों से भरपूर होता है। कच्चो सीताफल का रस विषैले तत्वों को बाहर निकालने, एसिडिटी दूर करने और वजन कम करने के लिए दिया जाता है। प्रोस्टेट की बीमारी के इलाज के लिए सीताफल क बीज खाने चाहिए। इसमें आयरन, मैगनीशियम, सेलेनियम और फास्फोरस होता है। जिन लोगों का पेट गरमी और मौसम में गडबडा जाता है, उनके लिए यह बहुत अच्छा है।
आलू : आलू सालभर मिलता है, लेकिन गर्मियों में इसकी खपत बढ जाती हहै। आलू में विटामिन सी और बी 6 पोटेशियम, फास्फोरस मैगनीशियम, आयरन, कॉपर और रेशा होता है चुंकि ये अत्यघिक क्षारीय होते है, इसलिए इन्हें गर्मियों में खाना अच्छा होता है। इनके छिलकें एंटी ऑक्सीडेंट ये भरपूर होते है, इसलिए इन्हें छील कर नहीं खाना चाहिए। इन्हें उबाल कर या भून कर खाना अच्छा होता है, क्योकि तब इसके विटामिन और खनिज तत्व अघिक मात्रा में बरकरार रहते है। युरिक एसिड बढने पर कच्चे आलू का जूस पीना चाहिए।
लौकी, तोरी और टिंडा : ये सब्जियां खनिज तत्वों से भरपूर होती है। क्षारीय होने के कारण शरीर को ठंडक पहुंचाती है। अकसर हम इन्हें खाना पसंद नहीं करते, पर ये बहुत फायदेमंद होती है। इन्हें अपने भोजन में शामिल करने के लिए इन्हें बनाने की नयी - स्वादिष्ट रेसिपी मालूम करें। कश्मीरी डिश यखनी बनाने के लिए लौकी को बडे टुकडों में काट कर दही में पका कर खाएं।
हरे बींस, फ्रेंच बींस और फ्लैट बींस : हरे बींस कॉपर मैगनीज, जिंक, मैगनीशियम और सोडियम से भरपूर होत है। ये सभी खनिज शरीर के लिए जरूरी होते है। हरे बींस फाइबर से भरपूर होत्रे है, जो कोलेक्ट्रॉल को कम करने में मददगार होते है। अघिकतर हरी सब्जियां कैरोटिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन से भरपूर होती है।
प्याज : प्याज बहुत ही उपयोगी सब्जी है। इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण होते है। यह खूनसे विषैले तत्वों को बाहर निकालता है। इसकी सब्जी बना कर खाने से बुखार, कफ और कोलेस्ट्रॉल कम होता है। पुराने जमाने में इजिप्शियन नियमित रूप ये प्याज और लहसुन खाते थे सल्फर की वजह से इनसे तीखी गंघ आती है। कच्चा प्याज खाने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढता है। प्याज और अदरक का रस आस्थमा के रोगियों के लिए अच्छा होता है। प्याज खाने से खून पतला होता है और लिवर की बिमारियों के इलाज के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्याज खाने के बाद मुंह से गंघ आने लगती है, लेकिन पोदीन की पत्तियां खाने से इस गंघ को दूर किया जा सकता है।
टमाटर : दिन में रोज एक टमाटर खाएं और बीमारियों को दूर भगाएं। टमाटर विटामिन ए,सी, फोलेट, पोटेशियम, फाइबर ओर दुसरे सभी तरह के सुरक्षात्मक एंटी ऑक्सीडेंट बहुतायत में मिलते है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है और प्रतिरोघक क्षमता बढती है, जिससे कोल्ड ओर फ्लू नहीं होता। टमाटर प्राकृतिक सनस्क्रीन का भी काम करता है। इसे खाने से घमनियों और दिल के रोग की समस्याएं नहीं होती। यह बढती उम्र को रोकने में मददगार फ्री रेडिकल्स लाइकोपेन और बीटा कैराटिन से भरपूर होते है। अगर टमाटरों को थोडा गरम करके या फिर थोडी सी चिकनाई के साथ खाया जाएं, वो यौवन को संरक्षण प्रदान करनेवाले पोषक तत्वों में इजाफा होता है।

3 comments:

Udan Tashtari said...

वाह जी, बड़ी स्वास्थय वर्धक और ज्ञानवर्धक जानकारी दी. बुक मार्क कर लिया है, बहुत आभार!!

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया जानकारी है .. पर खाने या किचन गार्डन में लगाने के लिए सलाद के पत्‍ते कहां से प्राप्‍त किया जाए .. क्‍या जानकारी देंगे ?

Vijay Kumar Sappatti said...

namaskar mitr,

aapka ye lekh padhkar bahut jaankaari hui .

maine iska print nikaal diya hai apni beti ke liye ..

aapka dhanyawad.


meri nayi kavita " tera chale jaana " aapke pyaar aur aashirwad ki raah dekh rahi hai .. aapse nivedan hai ki padhkar mera hausala badhayen..

http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html

aapka

Vijay