Tuesday, April 7, 2015

गुलाब जल और गुलाब ऑयल

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive

पंजाब में बठिंडा में कलालवाला गांव के किसान राजिंदरपाल सिंह भोला की मेहनत रंग लाने लगी है। 2004 में उन्होंने 4 रुपए की गुलाब की कलम और देग (मिट्टी का बड़ा बर्तन) के सहारे काम स्टार्ट किया और आज हर साल 6 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। इसको लेकर युवा किसान भोला को स्टेट अवॉर्ड भी मिल चुका है।
भोला के गुलाब की महक अमेरिका और कनाड़ा तक पहुंचने लगी है। उनके द्वारा लगाई गई मशीन से बने गुलाब के तेल की मांग कई देशों में होने लगी है। इसको लेकर भोला ने बताया कि उन्होंने खेती में रिस्क लेते हुए एक साथ ही छह एकड़ में गुलाब की खेती शुरू कर दी। उस समय इस पर कुल 4 रुपये इन्वेस्टमेंट करनी पड़ी थी।



ऐसे बनाते हैं गुलाब जल और गुलाब ऑयल
भोला के चचेरे भाई युवा किसान रॉबिन भाकर ने बताया कि उन्होंने फैक्ट्री खुद लगा रखी है। पहले गुलाब के फूलों को सुबह-सुबह तोड़ा जाता है। 80 किलोग्राम फूलों को एक बड़ी देग (मिट्टी का बड़ा बर्तन) में डाल कर साफ पानी डाला जाता है। ऊपर से टाइट करके बंद कर दिया जाता है। देग के नीचे हल्की आग जला दी जाती है। इससे पानी वाष्प बन कर भभके में चली जाती है। उस भभके को पानी में रखा जाता है। ऐसे में भाप जब भभके में पहुंचती है, तो वहां का तापमान कम होने से वो भी तरल बन जाती है और वह यह गुलाब जल बन जाती है। जब गुलाब के चार भभके भर जाते हैं, तो उनको एक अन्य बड़ी देग में डाल कर उनको उसी प्रक्रिया से गुजारा जाता है, तो उस के ऊपर गोल्डन कलर का गुलाब ऑयल जाता है। एक क्विंटल गुलाब पर सिर्फ 3 से 5 एमएल ऑयल ही आता है। एक किलोग्राम गुलाब ऑयल की अंतर राष्ट्रीय मार्केट में कीमत 15 लाख के करीब है। उनके गुलाब जल को एक्सपोर्टर खरीद लेते हैं। उनके गुलाब की मांग कनाड़ा और अमेरिका में ज्यादा है। क्योंकि उनका गुलाब आर्गेनिक होता है। वो किसी भी खाद्य रसायन का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

गुलाब के फूलों को तोड़ता भोला

चाचा ने दिया गुलाब की खेती का आइडिया

भोला के चाचा जगदेव सिंह को भ्रमण का काफी शौक था। वो घूमते-घूमते आगरा चले गए, वहां उन्होंने गुलाब की खेती होती देखी। तो इसके बारे में पता किया। देखा कि पंजाब का मौसम भी गुलाब की खेती के अनुकूल है। पंजाब में भी इसकी खेती की जा सकती है। इससे रिवायती खेती से छुटकारा मिलेगा और जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी। उन्होंने गांव आकर भोला को गुलाब की खेती करने के लिए उत्साहित किया।

लोकल में गुलाब जल की बहुत डिमांड है

भोला सिंह ने बताया कि उनके गुलाब जल की लोकल बहुत डिमांड है। उनके द्वारा भाकर आर्गेनिक प्रोडक्ट्स के नाम पर गुलाब जल की पैकिंग करके गुलाब जल सेल किया जाता है और जो भी एक बार इसका इस्तेमाल करता है, वो जिंदगी में और किसी गुलाब जल का इस्तेमाल नहीं कर सकता।

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