Friday, August 29, 2008

गुणों की खान है नीबू


नई दिल्ली, भाषा : नीबू का नियमित सेवन सेहत के लिहाज से बेहद लाभकारी है। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है। एक नीबू दिन भर की विटामिन सी की जरूरत पूरी कर देता है। शायद इसके स्वास्थ्य रक्षक गुणों के चलते ही पश्चिमी देशों में इसके सेवन को बढ़ावा देने के लिए 29 अगस्त को लेमन जूस डे मनाया जाता है। खाने में नीबू का इस्तेमाल कब से हो रहा है इसके निश्चित प्रमाण तो नहीं हैं लेकिन यूरोप और अरब देशों में लिखे गए दसवीं सदी के साहित्य में इसका जिक्र मिलता है। मुगल काल में नीबू को शाही फल माना जाता था। कहा जाता है कि भारत में पहली बार असम में नीबू की पैदावार हुई। फोर्टिस अस्पताल की आहार विशेषज्ञ साक्षी चावला ने बताया कि किसी भी अन्य फल के मुकाबले नीबू में विटामिन सी की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। यह एंटी आक्सीडेंट की तरह काम करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है। साक्षी ने कहा कि नीबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं, जिसके चलते ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। रक्ताल्पता से पीडि़त मरीजों को भी नीबू के रस के सेवन से फायदा होता है। यही नहीं, नीबू का सेवन करने वाले लोग जुकाम से भी दूर रहते हैं। बहरापन दूर करेगी जीन थिरैपी वाशिंगटन, एजेंसी : सुनने की समस्या (बहरापन) से ग्रस्त विश्व के लाखों लोगों को चिकित्सक अब जीन थिरैपी की मदद से ठीक करने की तैयारी में हैं। नेचर मैगजीन में प्रकाशित हालिया अध्ययन में कहा गया है कि कान के अंदर की कोशिकाओं को फिर विकसित कर बहरेपन की समस्या से मुक्ति दिलाई जा सकती है। डा. जान ब्रिगांदे के नेतृत्व में अमेरिकी शोधकर्ताओं के एक दल ने इसके लिए चूहे पर प्रयोग किए। इसके तहत बालों की वृद्धि को नियंत्रित करने वाली कोशिका एटो 1 के जीन को गर्भ में पल रहे एक चूहे के कान के अंदरूनी हिस्से में प्रत्यारोपित कर दिया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि उसके कान में नई कोशिकाएं विकसित होने लगीं। डेली टेलीग्राफ में ब्रिगांदे के हवाले से कहा गया है कि उन लोगों के लिए यह उत्साहव‌र्द्धक खबर है जिनकी सुनने की क्षमता कम हो गई है और कानों में झनझनाहट होती रहती है। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि एक दिन हम ऐसे मरीजों की सुनने की क्षमता फिर बहाल करने में समर्थ होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि शोधकर्ताओं को अपने प्रयोग में कान के अंदरूनी हिस्से में बालों की वृद्धि नियंत्रित करने वाली नई कोशिकाएं विकसित करने में मदद मिली।

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