Sunday, June 7, 2009

अमूल

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। गुजरात को- आपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन [जीसीएमएमएफ] ने 'मिशन 2020' के तहत अगले 11 सालों में अपने टर्नओवर को बढ़ाकर 27 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना बनाई है। देश की यह सबसे बड़ी सहकारी डेयरी अमूल ब्रांड के नाम से दुग्ध उत्पाद बनाती है।

लगातार तीसरे साल 6700 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल जीसीएमएमएफ ने न केवल मंदी को मात दी है, बल्कि साबित किया है कि सहकारी संस्थाएं प्रतिकूल हालात में भी लोगों की रोजी-रोटी को सुरक्षित रख सकती हैं। मिशन 2020 के लिए जीसीएमएमएफ ने दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि कर उसे एक करोड़, 95 लाख लीटर दैनिक करने का संकल्प लिया है।

अमूल ने यह असाधारण कार्यकुशलता ऐसे समय दर्शाई है जब मंदी के कारण दुनिया भर में दूध एवं दुग्ध उत्पादों की मांग में जबरदस्त कमी देखने को मिल रही है। हाल के महीनों में सभी प्रमुख डेयरी उत्पादकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में अच्छी खासी कमी की है। इसके बावजूद अमूल ने घरेलू भारतीय बाजार में अपने आपको अच्छी तरह जमाए रखा है और किसानों को विश्वव्यापी मंदी के प्रभाव से बेअसर रखने में कामयाब हुआ है। इस तरह भारत में आर्थिक मंदी के प्रतिकूल प्रभाव को निष्प्रभावी करने में डेयरी को-आपरेटिव क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका साबित हुई है और अमूल इसका का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहा है।

मंदी से मुकाबले के साथ अमूल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने शहरों में निर्माण क्षेत्र से विस्थापित होकर वापस गांव लौटे हजारों हताश-निराश मजदूरों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराकर उनमें आशा का संचार किया है। अब ये मजदूर अपने गांवों में डेयरी को-आपरेटिव सोसाइटी को दूध बेचकर अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इस तरह अमूल ने जनसंख्या के सबसे संवेदनशील तथा उपेक्षित वर्ग को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है।

इस बीच उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच और ब्रांड अमूल की ज्यादा से ज्यादा दृश्यता एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जीसीएमएमएफ ने अमूल पार्लरों का व्यापक नेटवर्क देश के विभिन्न शहरों तथा कस्बों में बिछाया है। इस तरह के चार हजार से ज्यादा पार्लर अब तक खोले जा चुके हैं। पचास अमूल पार्लर तथा इससे भी ज्यादा अमूल आइसक्रीम स्कूपिंग पार्लर प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर खोले गए हैं। और तो और अमूल पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है। पिछले दो सालों में अमूल के सदस्यों ने गुजरात में 71.65 लाख से ज्यादा वृक्ष लगाए हैं।

3 comments:

RAJNISH PARIHAR said...

लगता है टेस्ट इंडिया का,सबको खूब भा रहा है....

Abhishek Mishra said...

Amul ki uplabdhi sarahniya hai.

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने