Saturday, September 5, 2009

सुखोई-30 और भारतीय युवती सुमन शर्मा

प्रस्तुति - वार्ता
दुनिया के सबसे जांबाज लड़ाकू विमान ‘सुखोई-30 एमकेआई’ की कॉकपिट पर अब तक के पुरूष वर्चस्व को चकनाचूर करते हुए एक भारतीय युवती ने इसमें उड़ान भर इतिहास रच दिया है।

भारतीय युवती सुमन शर्मा ने रूस में हाल ही में सम्पन्न हवाई कार्यक्रम में भारत के लिए यह गौरव अर्जित किया और सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाली वह विश्व की प्रथम महिला बन गई।

सुखोई विमान भारतीय वायु सेना में 12 साल से है और रूस की वायु सेना का भी यह अग्रिम पंक्ति का विमान है लेकिन यह पहला मौका था जब कोई महिला इसकी कॉकपिट में बैठी।

सुमन शर्मा वही युवती हैं जिन्होंने इस साल के ‘एयरो इंडिया’ में अमेरिकी लड़ाकू विमान ‘एफ-16’ और रूसी विमान ‘मिग-35’ में उड़ान भरी थी लेकिन ‘सुखोई-30 एमकेआई’ असैनिकों की उड़ान के लिए अभी तक उसका सपना ही बना हुआ था। दुनियाभर के पायलट सुखोई में उड़ान भरने की हसरत रखते हैं लेकिन भारत की एक साधारण युवती को सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने कीर्तिमान बनाने का अवसर दिया।

सुमन की यह उड़ान मॉस्को से करीब 40 किलोमीटर जुकोव्स्की से हुई और सुखोई डिजाइन ब्यूरो के टेस्ट पायलट यूरी वास्चुक ने इस भारतीय युवती का सपना साकार किया। इतिहास रचने से उत्साहित सुमन शर्मा ने जोश के साथ बताया कि सुखोई में वह 12 हजार फुट की ऊंचाई तक गई और एक समय था जब उनके शरीर पर गुरूत्वाकर्षण का पांच गुना दबाव था। यानी आंकडों की भाषा में उस समय इस युवती का वजन 230 किलो से ऊपर चला गया था।

सुखोई की इस यादगार उड़ान के सबसे रोमांचक क्षण की याद करते हुए उन्होंने बताया कि उड़ान के समय एक बार ऐसा लगा कि विमान रूका हुआ है। मैंने पायलट यूरी से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्होंने विमान पर ब्रेक लगा दिए हैं। उस समय ऐसा लग रहा था कि सुखोई हवा में ठहरा हुआ है। उड़ान के समय बाहर का वातावरण बहुत खराब था और सुमन के अनुसार आकाश में धुंध की सफेद चादर फैली हुई थी।

विमान एक समय 700 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर था यानी वह ध्वनि की गति को पीछे छोड़ चुका था। यूरी ने अचानक सूचित किया कि अब वे जोन चार में प्रवेश कर रहे हैं। यह सुखोई के हवा में कुलांचे लगाने का क्षण था। विमान ने 360 डिग्री का पूरा टर्न लिया और मैंने चारों देखा तो लगा कि कांच के कवच में ऐसे हिलडुल रही हूं जैसे बच्चा मां के गर्भ में सिकुड़ा हुआ होता है।

भारतीय महिला की सुखोई में यह उड़ान ऐसे समय हुई है जब दुनिया की छह दिग्गज कम्पनियां भारतीय वायु सेना के लिए होने वाले 126 लड़ाकू विमानों के सौदे को हासिल करने के जी-तोड़ प्रयास कर रही हैं। इन देशों में रूस अपना मिग-35 विमान उतार रहा है।

4 comments:

Vidhu said...

इतिहास रचने से उत्साहित सुमन शर्मा ने जोश के साथ बताया कि सुखोई में वह 12 हजार फुट की ऊंचाई तक गई और एक समय था जब उनके शरीर पर गुरूत्वाकर्षण का पांच गुना दबाव था। यानी आंकडों की भाषा में उस समय इस युवती का वजन 230 किलो से ऊपर चला गया था।...suman sharma ko badhai

राज भाटिय़ा said...

विमान एक समय 700 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर था यानी वह ध्वनि की गति को पीछे छोड़ चुका था।
विवेक जी लगता है आप से कही कोई गल्ती हुयी है, क्योकि आम जहाज की रफ़तार तो ९०० किमी प्रति घंटा से ज्यादा होती है, ओर इस जहाज की रफ़तार तो बहुइत ज्यादा होनी चाहिये,
बाकी आप का लेख बहुत अच्छा लगा.
धन्यवाद

Vivek Gupta said...
This comment has been removed by the author.
Vivek Gupta said...

Thanks Raj Ji, your observation made me to do some interesting research on mach speeds
as per http://en.wikipedia.org/wiki/Speed_of_sound

Sound is a vibration that travels through an elastic medium as a wave. The speed of sound describes how far this wave travels in a given amount of time. In dry air at 20 °C (68 °F), the speed of sound is 343 meters per second (1,125 ft/s). This equates to 1,236 kilometers per hour (768 mph), or about one mile in five seconds.

http://en.wikipedia.org/wiki/Mach_number
Mach 2.0 (2,120 km/h, 1,320 mph)
Mach 1.0 (1,225 km/h, 761.2 mph)