Saturday, January 2, 2010

4875-द कैफे

प्रस्तुति - जागरण चमोली [दीपक फरस्वाण]

क्या आपने कभी किसी ऐसे रेस्टोरेंट के बारे में सुना या पढ़ा है, जहां लजीज खाने के बाद होटल मालिक द्वारा एक अनूठी डिश परोसी जाती है, वो भी बिल्कुल मुफ्त। स्वीट डिश भी ऐसी, जिससे पेट की नहीं ज्ञान की भूख शांत होती है। यह अनूठी डिश है पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां, जिन्हें ग्रहण करना यहां आने वाले हर ग्राहक के लिए आवश्यक है। इस अनूठे रेस्टोरेंट का नाम है 4875-द कैफे।

उत्तराखंड के चमोली में खोले गए इस रेस्टोरेंट का मकसद व्यवसाय नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। मुंबई की रहने वाली सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर एसके त्रिखा की 22 वर्षीय बेटी निखिला त्रिखा होटल मैनेजमेंट प्रशिक्षित है। वह इस रेस्टोरेंट की मालिकिन भी हैं और वेटर भी। रेस्टोरेंट से होने वाली कमाई को वह अपनी जरूरतों पर नहीं, बल्कि पर्यावरण को बचाने में खर्च कर रही है। दरअसल, कुछ वर्ष पूर्व निखिला उत्तराखंड भ्रमण पर आई थीं। यहां पर्यावरण की बदहाल स्थिति देख द्रवित हो उठी। निखिला ने अपने स्कूलमेट पुष्पेंद्र सिंह रावत के साथ उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने 2007 में 'पीस ट्रस्ट' नामक संस्था का गठन किया। इसके तहत पुष्पेंद्र विभिन्न स्कूलों में कार्यक्रम प्रस्तुत कर छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। जबकि निखिला ने जिला मुख्यालय गोपेश्वर से सात किलोमीटर दूर स्थित घिंघराण गांव में '4875-द कैफै' नाम का रेस्टोरेंट खोला है। उसने इसकी शुरूआत एक छोटे से माल्टा के बगीचे में मात्र 16 हजार की लागत से की है। रेस्टोरेंट में सूखे पेड़ों की डाटें फर्नीचर के रूप में व्यवस्थित हैं। यहां आने वाले ग्राहकों की मांग पर निखिला अपने हाथ से बनाए लजीज व्यंजन परोसती हैं। बातों-बातों में वह उन्हें पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाना नहीं भूलतीं। पढ़ाने का तरीका भी ऐसा कि ग्राहकों की क्लास भी लग जाती है और उन्हें वहां आना खलता भी नहीं। इतना ही नहीं निखिला का रेस्टोरेंट रोजगार के नाम पर पहाड़ों से पलायन कर रहे युवाओं के लिए भी नजीर बन गया है। दो वर्ष के दौरान निखिला और पुष्पेंद्र गांव के पास पांच हजार पौधे लगा चुके हैं। इसके अलावा, सिद्घपीठ तुंगनाथ के मार्ग पर दर्जनों डस्टबिन रख चुके हैं।

1 comment:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर बात बताई आप ने, धन्यवाद