Saturday, December 7, 2013

शुभ दिन

कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती |
करमूलेतगोविन्दम प्रभाते करदर्शनम ||

जिसका अर्थ है हाथो के आगे भाग में लक्ष्मी जी , मध्य में सरस्वती जी और मूल भाग में विष्णु जी का वास है. अर्थात भगवान ने हमारे हाथों में इतनी ताकत दे रखी है,ज़िसके बल पर हम धन अर्थात लक्ष्मी अर्जित करतें हैं। जिसके बल पर हम विद्या सरस्वती प्राप्त करतें हैं। इतना ही नहीं सरस्वती तथा लक्ष्मी जो हम अर्जित करते हैं, उनका समन्वय स्थापित करने के लिए प्रभू स्वयं हाथ के मध्य में बैठे हैं। ऐसे में क्यों न सुबह अपनें .हाथ के दर्शन कर प्रभू की दी हुई ताकत का अहसास करते हुए तथा प्रभू के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए दिन की अच्छी शुरूवात करें। 

आप सुबह उठ कर अंजुली बना कर दोनो हाथो का दर्शन किजिए फिर हाथों से आँखों और चेहरे को छुए . इसके पश्चात भूमि को भी वंदन करे . फिर श्वास पर ध्यान दे और जो भी स्वर चल रहा हो वही पैर भूमि पर पहले रखे .ऐसा करने से दिन शुभ होगा और जो भी कार्य हाथों से होगा वो अच्छा ही होगा .

(स्वर का पता लगाने के लिए देखे कि कौन सी नासिका में से सांस आसानी से और ज्यादा आ और जा रहा है उसी तरफ़ के पैर को भूमि पर पहले रखे)

हाथ जोड़ने से देवताओं के तत्वों की तरंगें अंजलि की ओर आकृष्ट होती है .यहाँ ये घनीभूत हो कर घुमती रहती है .अंजुली बनाने की मुद्रा को ब्रम्ह मुद्रा कहते है . इसे बनाने से सुषुम्ना नाडी कार्यरत होती है . रात्री में सोने से देह में तमो गुण बढ़ जाता है इसे कम करने में ये मुद्रा सहायक होती है .

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