Saturday, September 27, 2014

सॉफ्ट स्किल्स और बिहेवियर

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर

# Leader
# Creative
# Progressive


बेशुमार पूंजी से ही करोड़ों के उद्यम खड़े किए जा सकते हैं, यह एक भ्रम है। आपके भीतर का हुनर भी ऐसा कर पाने में सक्षम है। स्वप्निल कामत ने अपनी प्रतिभा की बदौलत इस बात को साबित किया है। एक बेहतरीन वक्ता होने के बावजूद स्वप्निल को कुछ सालों पहले तक यह अंदाजा नहीं था कि एक दिन अपनी इस खूबी की बदौलत वे एक कामयाब उद्यमी बन पाएंगे।

कंपनी : वर्क बेटर
संस्थापक : स्वप्निल कामत
क्या खास : कॉर्पोरेट जगत के जूनियर और मिडिल लेवल कर्मचारियों को दिलचस्प तरीके से सॉफ्ट स्किल्स और बिहेवियर में ट्रेनिंग प्रदान करना। 
गोवा में पले-बढ़े स्वप्निल कामत ने गोवा के धेम्पे कॉलेज से बीकॉम किया। पढ़ाई के दौरान वह अपने पिता के हार्डवेयर बिजनेस में सेल्स एग्जीक्यूटिव के तौर पर मदद किया करता था। बचपन में शर्मीले और कम बोलने वाले स्वप्निल ने इस काम की बदौलत अपने भीतर कुछ नई खूबियों को पोषित किया। सबसे महत्वपूर्ण खूबी जो उसने अपने आपमें विकसित की थी, वह थी संवाद कुशलता यानी बात करने की कला। टेक्निकल आईटी फीचर्स को वह ग्राहकों को बड़ी सरलता से समझा देता था। इसके साथ ही कॉलेज में उसने ईएनटी नामक ईवेंट कंपनी शुरू की, जो कॉलेज और यूथ ईवेंट्स आयोजित करती थी। 
इसी दौरान स्वप्निल यह समझ चुका था कि एंटरप्रिन्योरशिप में उसकी खासी दिलचस्पी थी जिसकी बारीकियां उसे इन कामों से सीखने को मिलीं। लेकिन अभी भी वह यह नहीं जान पाया था कि उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है। पढ़ाई पूरी हुई तो स्वप्निल ने एमबीए करने का फैसला लिया और पुणे के सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में एडमिशन ले लिया।
यंग एंटरप्रेन्योर : नया करने के हौसले ने बनाया करोड़पति कारोबारी

एमबीए पूरा करने के बाद उसने लॉरियल में ब्रांड मैनेजर के रूप में काम करना शुरू किया। एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित नौकरी के बावजूद स्वप्निल एंटरप्रिन्योरशिप का आकर्षण छोड़ नहीं पाया था। कुछ ही दिनों में उसे लगने लगा कि उसे नौकरी के बजाय खुदका वेंचर शुरू करना चाहिए। आखिरकार स्वप्निल ने अपना जॉब छोड़कर 2006 में ट्रिप टू गोवा डॉट कॉम की शुरुआत की। पहले वर्ष में ही इस वेंचर को अच्छा रेस्पॉन्स मिला और खासा मुनाफा भी। इसी दौरान स्वप्निल को बैंक ऑफ अमेरिका के लिए एक ईवेंट आयोजित करने का मौका मिला।

नए प्रयोग करने की जरूरत ने बदला रास्ता 

यह मौका उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट था। यहां स्वप्निल ने सॉफ्ट स्किल्स की वर्कशॉप्स देखी। उन्होंने महसूस किया कि हिंदुस्तानी मिडिल व जूनियर एग्जीक्युटिव्स को इस ट्रेनिंग की जरूरत कुछ नए प्रयोगों के साथ थी। यही सब सोचते हुए स्वप्निल ने सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग को व्यवसाय में तब्दील करने के बारे में सोचा। उनका यह आइडिया अनोखा होने के साथ-साथ जोखिम भरा भी था। अनोखा इसलिए क्योंकि वे पारंपरिक कॉर्पोरेट ट्रेनिंग को एक नया और दिलचस्प रूप देना चाहते थे और जोखिम भरा इसलिए क्योंकि उन्हें कॉर्पोरेट ट्रेनिंग का अनुभव नहीं था। स्वप्निल ने इस जोखिम को एक अवसर के तौर पर देखा और एक कॉर्पोरेट ट्रेनिंग कंपनी खोलने का फैसला किया।


कम उम्र में ऊंचा मुकाम

स्वप्निल कामत की उम्र सिर्फ 32 वर्ष है लेकिन कॉर्पोरेट सॉफ्ट स्किल ट्रेनर के रूप में उन्होंने एक ऊंचा मुकाम हासिल किया है। एग्जीक्यूटिव ट्रेनिंग कंपनी वर्क बेटर के जरिए स्वप्निल कॉर्पोरेट कर्मचारियों को बिहेवियरल और सॉफ्ट स्किल्स में ट्रेनिंग प्रदान कर रहे हैं। अब तक वर्क बेटर देश भर में 75,000 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग प्रदान कर चुकी है। अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए वर्क बेटर की सेवाएं लेने वाले कॉर्पोरेट्स में एचडीएफसी बैंक, एनएसई, जॉनसन एंड जॉनसन और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा जैसी नामी कंपनियों का नाम शामिल है।

रिसर्च के बाद की शुरुआत 
अनुभव हासिल करने के लिए स्वप्निल ने कॉर्पोरेट ट्रेनिंग सेशन्स में जाना शुरू किया, लेकिन ये उन्हें काफी नीरस और टेक्निकल लगे। ट्रेनिंग के पुराने और बोरिंग तरीकों को दिलचस्प बनाने के लिए उन्होंने रणनीति बनाना शुरू किया। काफी रिसर्च और अध्ययन के बाद एग्जीक्यूटिव ट्रेनिंग की प्रक्रिया में मूलभूत बदलाव करके प्रोफेशनल्स की मदद के लिए कुछ नए तरीके इजाद किए। इस तैयारी के बाद 2008 के अंत में अपनी बचत के 2.5 लाख रुपए से स्वप्निल ने अपनी कंपनी वर्क बेटर की नींव रखी।
मंजिल के रास्ते में मुश्किलें
मुंबई में एक छोटा ऑफिस किराए पर लेकर स्वप्निल ने काम शुरू किया। वर्क बेटर की स्थापना के बाद डेढ़ साल उनके लिए काफी मुश्किलों भरा था। इसके दो कारण थे, पहला यह कि वर्क बेटर का आइडिया नया था और दूसरा यह कि उन्हें इस फील्ड का ज्यादा अनुभव नहीं था। एक क्लाइंट से शुरुआत हुई और फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़ती गई। नौ माह में वर्क बेटर ने 5.5 लाख रुपए कमाए। 500 एग्जीक्यूटिव्स की ट्रेनिंग से शुरुआत करने वाली वर्क बेटर वर्तमान में 18,000 एग्जीक्यूटिव्स को सालाना ट्रेनिंग दे रही है। साथ ही कंपनी का का टर्नओवर 2013-14 में 4.2 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है, जो पहले वर्ष में 15 लाख रुपए था। 
स्वप्निल ने इस वर्ष 50 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद के साथ मुंबई के बाद अब गोवा में भी अपनी कंपनी का बैक ऑफिस शुरू किया है। एंटरप्रिन्योर बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले युवाओं के लिए स्वप्निल कामत का संदेश है कि अपनी क्षमता, पसंद और लंबे समय तक फायदेमंद साबित होने वाले काम को पहचानिए। इन तीन चीजों का मेल आपको एक सफल करियर की मंजिल पर पहुंचा सकता है।

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