Thursday, January 14, 2010

लाइफ मैनेजमेंट सिखाती है पतंग

प्रस्तुति - दैनिक भास्कर - रचना सिंह/दक्षा वैदकर

इक दिन रघुपति पतंग उड़ाई.. रामचरित मानस की यह चौपाई राम के साथ पतंग का उल्लेख करती है। भले ही पतंग का प्रारंभ चीन से माना जाता हो और विश्व में सबसे बड़ी आधुनिक पतंग चीन व मैक्सिको में बनती हो लेकिन भारतीय परंपरा में इसका वर्णन है। सदियों से पतंग हमारे यहां उड़ाई जा रही है और जीने का संदेश भी दे रही है।


काइपो छे की आवाज और बैकग्राउंड में ढील दे दे रे भैया गीत.., जमकर दांवपेंच और पतंग लूटने के बाद जीत का उल्लास.. कहने को यह कागज की बनी साधारण पतंग है, लेकिन इसका फंडा उतना ही दमदार है। पतंग न केवल मार्केट मैनजमेंट बल्कि जीवन का मैनेजमेंट भी सिखाती है।

25 साल से पतंगबाजी कर रहे जितेंद्र जोशी कहते हैं धागे की मजबूती पतंग की ऊंचाई तय करती है। यह सिद्धांत जीवन पर लागू होता है कि यदि हमारा मन सशक्त होगा तो हम चरित्र में मजबूत होंगे और आसपास की छोटी पतंग विचलित नहीं कर सकेगी।

हमारा मांजा कभी नहीं कटेगा और प्रतिष्ठा की पतंग सदैव ऊपर उड़ेगी। वे बताते हैं पतंग का फंडा है यदि डोरे में कांच ज्यादा मिला हो तो उड़ाते समय अंगुली कट जाती है उसी प्रकार आपके जीवन में व्यवहार कटीला, हठीला हो तो आप दूसरों को नुकसान ही पहुंचाएंगे।

टेढ़ी कांप यानी विनम्रता की कमी
पतंग के शौकीन विजेंद्र शास्त्री कहते हैं पतंग की कांप टेढ़ी हो जाए तो वह एक पक्षीय हो जाती है। उसकी कांप कभी सीधी नहीं रहती उसी प्रकार आप जीवन में विनम्र हैं तो जिदंगी में आने वाले हर तूफान का सामना कर सकते हैं।

पतंगबाजी में यदि जोते में छेद बड़े हो गए तो पतंग उड़ने लायक नहीं होती उसी प्रकार पांच इंद्रियों पर संयम जरूरी है। पतंग में खींच व ढील का फंडा काम करता है। उचके में मांजा लपेटा नहीं तो वह उलझ जाता है उसी प्रकार जीवन में जो सीख रहे हैं उसे व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करें।

हवा के झोंकों में बने रहने की सीख
रीडर आईएमएस दीपक श्रीवास्तव के अनुसार पतंग जीवन को रीप्रेजेंट करती है। तेज हवा के रूप में हमें आने वाली परेशानी को हम पतंग की तरह संयमित व्यवहार कर नई ऊंचाई पा सकते हैं। इसकी डोर आपकी कंसट्रेंट (संसाधन की लिमिटेशन) को रीप्रेजेंट करती है।

ऊंची उड़ान के साथ नियंत्रण
आईआईएम के प्रोफेसर पी.के. सिंह कहते हैं पतंग हमें सिखाती है कि हमें कब जिंदगी में कसावट लानी है और कब ढील देना है। यह बताती है कि सुगमशीलता से ऊंची उड़ान तो भरे और साथ ही नियंत्रण भी रखें। कुल मिलाकर यह हमें समन्वय सिखाती है। प्रो. रजनीश शर्मा कहते हैं मार्केट में कोई भी उत्पाद शुरू करने से पहले सर्वे करना होता है उसी प्रकार पतंगबाजी में हवा की डायरेक्शन दूसरी पतंग को देखकर तय की जाती है जो मार्केट सर्वे है। जब कोई कंपनी डूबती है तो अन्य कंपनियां उसकी संभावना देखकर उसका अधिग्रहण करना चाहती है वहीं पतंगबाजी में कटी पतंग अच्छी हो तो अन्य पतंगबाज उसे हथियाने की कोशिश करते हैं।

सिखाती है नीचे से ऊपर जाने की कला
प्रोटॉन बिजनेस स्कूल के चीफ मेंटर संदीप मानुधने बताते हैं संक्रांति से हमें मैनेजमेंट के कई गुर सीखने को मिलते हैं। पतंग को आसमान तक ले जाने की कोशिश से संघर्ष की सीख मिलती है। नीचे से ऊपर जाना एक कला है। यह तभी काम आती है जब हवा सही बह रही हो। यह हमें बताता है कला व संघर्ष करने की क्षमता के साथ सही समय का चुनाव करना भी जरूरी है। पतंगबाजी हमें टीम वर्क भी सीखाती है। पतंग कटने के बावजूद लोग खुश होते हैं, क्योंकि इसमें पूरी टीम शामिल होती है। यह सीखाती है यदि कर्मचारी परिवार की तरह काम करें तो दुख भी सुख लगने लगते हंै।

सही तालमेल का सबक
प्रो. दीपेश महाजन कहते हैं व्यापार में व्यक्ति, सामग्री और उद्यमी का सही तालमेल उसे बाजार में लाने के लिए जरूरी है वहीं पतंगबाजी में पतंग, धागा व तरीके से बांधे जोते पूर्व तैयारी के लिए जरूरी है। व्यापार में जब कोई हिस्सा कमजोर हो तो उसे सहारा देने के लिए निवेश करना पड़ता है, पतंग संतुलित न हो तो एक साइड पर मांजे से किरनी बांधना पड़ती है।

2 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर लगी आप की यह पतंग वाजी

sandhyagupta said...

Bahut kuch bata gayi yah post.Badhai.