Monday, October 27, 2008

दीपावली एवं नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं


प्रिय मित्रो,


आपके परिवारजनों, मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो । इसी कामना के साथ दीपावली एवं नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं


दीपावली से पूर्व अच्छी वर्षा से धनधान्य की समृद्धि रूपी लक्ष्मी का आगमन भी होता है। संवत्सर के उत्तरभाग में ऋत सोम तत्व रहता है जो लगातार दक्षिण की ओर बहता रहता है। दक्षिण भाग में ऋत अग्नि रहती है जो हमेशा उत्तर की ओर बहती है। लक्ष्मी का आगमन ऋताग्नि का आगमन ही होता है। यह दक्षिण से होता है, इसीलिए आज भी भारतीय किसान फसल की पहली कटाई दक्षिण दिशा से ही करता है। ऋताग्नि एक ऐसी ज्योति है जो पूरी प्रजा को सुख-शांति एवं समृद्धि प्रदान करती है और वही महालक्ष्मी है। ज्योतिषशास्त्र में भी जन्मकालीन ग्रहयोगों के आधार पर महालक्ष्मी योग देखा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है-
लक्ष्मीस्थानं त्रिकोणं स्यात् विष्णुस्थानं तु केंद्रकम्।


तयो: संबंधमात्रेण राज्यश्रीलगते नर: ।।
यह योग श्री लक्ष्मी प्राप्ति का संकेत देता है। केंद्रस्थान में लग्न, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम भाव गिने जाते हैं तथा त्रिकोण स्थान में पंचम एवं नवम भाव को माना गया है। जिस व्यक्ति का शरीर स्वस्थ हो, स्थायी संपत्ति, सुख-सुविधा के साधन हों, जीवनसाथी मनोनुकूल हो तो वह विष्णुस्वरूप बन जाता है। इन सब गुणों का उपयोग सद्बुद्धि एवं धर्मपरायणता के साथ हो तो व्यक्ति महालक्ष्मी एवं राज्यश्री को प्राप्त करने वाला होता है। व्यक्ति यदि कर्मशील होगा, सदाचारी होगा, गुरुनिंदा, चोरी, हिंसा आदि दुराचारों से दूर रहेगा तो लक्ष्मी स्वत: उसके यहां स्थान बना लेगी।
पौराणिक प्रसंगों में स्वयं लक्ष्मी कहती हैं-



नाकर्मशीले पुरुषे वरामि, न नास्तिके, सांकरिके कृतघ्ने।


न भिन्नवृत्ते, न नृशंरावण्रे, न चापि चौरे, न गुरुष्वसूये।।
अत: कर्मशील एवं सदाचारी व्यक्ति को ही राज्यश्री एवं महालक्ष्मी योग बन पाता है। जबकि लोगों की ऐसी धारणा है कि खूब पैसा, धन दौलत हो तो आनंद की प्राप्ति हो सकती है, पर यह धारणा गलत है। ज्योतिषशास्त्र एवं पौराणिक ग्रंथों में महालक्ष्मी का स्वरूप दन-दौलत या संपत्ति के रूप में नहीं बताया गया है।
लक्ष्मीवान उस व्यक्ति को माना गया है जिसका शरीर सही रहे और जिसे जीवन के हर मोड़ पर प्रसन्नता के भाव मिलते रहें। मुद्रा के स्थान एवं खर्च के स्थान को महालक्ष्मीयोग का कारक नहीं माना गया है बल्कि प्राप्त मुद्रा रूपी लक्ष्मी को सद्बुद्धि के साथ कैसे खर्च करके आनंद लिया जाए, इसे माना गया है। इसीलिए महालक्ष्मी पूजन में महालक्ष्मी, महासरस्वती एवं गणोश जी का पूजन एक साथ किया जाता है। गणेश बुद्धि के देवता हैं तथा सरस्वती ज्ञान की देवी हैं, इसीलिए लक्ष्मी के पहले श्री शब्द लगाया जाता है। यह श्री सरस्वती का बोधक होता है। इसका भाव यह निकलता है कि मुद्रारूपी लक्ष्मी को भी यदि कोई प्राप्त करता है तो श्रेष्ठ गति के साथ जो उसका उपयोग एवं उपभोग करता है, वह आनंद की अनुभूति करता है।

15 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ...
दीवाली आप और आप के परिवार के लिए सर्वांग समृद्धि लाए।

संगीता-जीवन सफ़र said...

आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक
शुभकामनायें/

Udan Tashtari said...

दीपावली के इस शुभ अवसर पर आप और आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

संगीता पुरी said...

आपके पूरे परिवार और मित्रगण सहित आपको भी परम मंगलमय त्‍यौहार दीपावलि की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आपको भी!
दीपावली मंगलमय हो ~~~

संदीप शर्मा Sandeep sharma said...

आपको भी सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये।

स्वप्रेम तिवारी said...

दीप जलें रोशन करें जग संसार तुम्हारा
उजियारे के आंचल में महके आंगन सारा

शुभ दीपावली

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

बहुत अच्छा है...... बधाई,
आपको, परिवार सहित दीपावली की शुभकामनायें......

सचिन मिश्रा said...

Bahut badiya , aap sabhi ko diwali ki hardik subhkamnayein.

राज भाटिय़ा said...

दीपावली पर आप को और आप के परिवार के लिए
हार्दिक शुभकामनाएँ!
धन्यवाद

Suresh Chandra Gupta said...

आप सब सुखी, स्वस्थ और सानंद हों. दीवाली की शुभकामनाएं.

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

दीपावली की हार्दिक
शुभकामनायें....
बधाई

DHAROHAR said...

Jaankaripurna lekh. dhanyawad aur swagat mere blog par bhi.

संगीता शर्मा said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । आपका ब्लाक बहुत सुन्दर है। हमें ब्लाक डिजाइनिंग नहीं आती।कृपया मदद करें । सादर,
-.कृष्णशंकर सोनाने

प्रदीप मानोरिया said...

हर बार की तरह लाज़बाब