Monday, October 6, 2008

मैडम की मार से ही मेरा हाथ टूटा

इंदौर. चोरल के पास सुरतीपुरा गांव में चौथी कक्षा की छात्रा का हाथ तोड़ने के मामले की रिपोर्ट सोमवार को सबमिट होगी। छात्रा ने अधिकारियों के सामने खुलकर बयान दिया कि पहाड़ा याद नहीं होने पर उसे प्रधानाध्यापिका सोनाली बुदे ने मुर्गा बनाया। पेन गिरने पर जब वह उसे उठाने लगी तो शिक्षिका ने पीठ पर लात मारी और उसका हाथ दीवार से टकरा गया। जिससे हाथ टूट गया।

हाथ टूटने से परेशान बच्ची का हाल जानने और उसके साथ हो रही ज्यादती का जायजा लेने रविवार को भास्कर टीम फिर सुरतीपुरा पहुंची। ललिता पहले की तरह अपने बयान पर कायम है।

स्कूल में ही पढ़ने वाली सपना, अलका और मुनिया ने भी कहा कि मैडम ने ललिता को मारा था। प्रधानाध्यापिका जिस छात्रा छीता पर दोष मढ़ रही है उस छात्रा ने भी कहा कि वह लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही है और उसने ललिता का हाथ नहीं तोड़ा है।

यही नहीं एक छात्रा ने बताया कि उसे स्कूल में धमकी दी गई थी कि मैडम ने हाथ तोड़ा, यह किसी को नहीं बताए। यह सभी बयान भास्कर के पास रिकॉर्ड हैं लेकिन छात्रा के भविष्य के मद्देनजर उसका नाम उजागर नहीं किया जा रहा है।

सांच को कैसी आंच

सच-झूठ का पहाड़ा, किस पात्र को क्या याद.. जानिए —

मां रामकन्या व पिता राजाराम -उस दिन जब शाम को लौटे तो घटना पता चली कि मैडम ने मुर्गा बनाया और मारा, जिसमें हाथ टूटा। इलाज के लिए हम मैडम के पास बीमा के पैसे पूछने गए थे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में अंगूठा लगवा लिया। पर यह नहीं बताया कि कागज में क्या लिखा है।

माया मालवीय, डीईओ- ललिता ने बताया था कि पहाड़ा याद नहीं होने पर मैडम ने मुर्गा बनाया था और लात मारी जिससे मेरा हाथ टूट गया।

आरएस मकवाना, संकुल प्रभारी, चोरल -ललिता ने बताया कि प्रधानाध्यापिका ने उसे मारा और उसका हाथ टूट गया। हालांकि अलग-अलग बयान भी आए हैं। मैंने प्रधानाध्यापिका से सफाई मांगी है कि घटना की जानकारी संकुल को क्यों नहीं दी गई?

मदनलाल गुप्ता, बीईओ, महू -ललिता ने कहा, मैडम सोनाली बुदे ने मारा जिससे हाथ टूट गया। जबकि मैडम ने कहा छीता के साथ खेलते समय हाथ टूटा। हम छीता से नहीं मिल पाए। रिपोर्ट माया मालवीय के पास है। वही जमा करेंगी।

रामगोपाल गोदिया, शिक्षक, चोरल हाईस्कूल -बच्चों ने बताया छिपा-छाई खेलते समय छीता ने ललिता को धक्का दिया। फिर भी शिक्षकों को इलाज कराना चाहिए था। हमने स्पष्टीकरण मांगा है। (गोदिया ने छिपा-छाई कहा, कबड्डी नहीं)

मेरा विचार
१। बच्चों को हर बात में मारना ठीक नहीं है
२। अगर अध्यापकों को बच्चों से स्नेह नहीं है तो कोई दूसरा काम तलाशना चाहिए
३। मारने पीटने से बच्चों के मन पर बहुत बुरा असर पड़ता है
४। एक तो अध्यापक मारते पीटते हैं फिर झूट बोलतें हैं प्रतिदिन ऐसे कई उदहारण सुनने को मिलतें हैं जबकि छोटा बच्चा अपनी बात को अच्छी तरह से कह भी नहीं पाता है

2 comments:

seema gupta said...

एक तो अध्यापक मारते पीटते हैं फिर झूट बोलतें हैं प्रतिदिन ऐसे कई उदहारण सुनने को मिलतें हैं जबकि छोटा बच्चा अपनी बात को अच्छी तरह से कह भी नहीं पाता है
" absolutely right, i too agree with your thoughts and remark'

regards

ranjan said...

ye kyaa baat hai.. अध्यापक है या जल्लाद..