Sunday, September 28, 2008

2020 का ऑफिस यानी मौजां ही मौजां

नई तकनीक के साथ सबकुछ बदल रहा है। कॉर्परट ऑफिस, कड़क बॉस, टेंशन वाली मीटिंग्स सबकुछ 2020 तक बदलने वाला है।
डालते हैं इन पर एक नजर-
घर से दफ्तर का काम
आजकल हर शख्स अपने घर से काम करना पसंद करता है। कॉर्परट ऑफिस गायब हो रहे हैं। वजह है 'प्लग ऐंड प्ले' ऑफिस। इन पर लॉगइन करके कोई भी कहीं से अपनी जॉब कर सकता है। भारत में आईबीएम और प्रॉक्टर ऐंड गैंबल जैसी कंपनियां यही तकनीक अपना रही हैं। उम्मीद है, 2020 तक बॉस भी यह ध्यान देना छोड़ देंगे कि कौन कब ड्यूटी पर आ रहा है? वह घर से काम कर रहा है या ऑफिस से। हो सकता है, तब हफ्ते में चार दिन ही काम करना पड़े।
हाई-टेक ऑफिस
इंटेलिजंट फर्नीचर ऑफिस को और बेहतर व आरामदेह बना देंगे। ऐसी कुर्सियां होंगी, जो पहचान जाएंगी कि कब आप काम करते-करते थक गए हैं। ऐसे में वह आपके बॉस को सिग्नल भेजकर बता देंगी कि काम का बोझ थोड़ा कम कर दें। इंटेलिजंट दरवाजे अपने स्कैनर से आपका आईकार्ड पढ़कर आपका कंप्यूटर ऑन कर देंगे। यही नहीं, पिछली बार आप जिस पेज पर काम कर रहे थे, वही पेज खुल जाएगा। बोर्ड मीटिंगों की जगह विडियो कॉन्फ्रेंसिंग लेने लगेंगी।
जॉब्स की चौपाल
2020 तक टैलंट सर्च एजंसियों, जॉब पोर्टल्स के दिन लद जाएंगे। तब सोशल नेटवर्किन्ग साइट्स लोगों को हायर करने के सेंटर बन जाएंगी। पैसे की बचत के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी देने की जगह फ्रीलांसर्स और टेंपररी वर्कर्स को तरजीह दी जाएगी।
बॉस बनेंगे 'कूल बडी'
कंपनियों के सीईओ और कड़क बॉस तक एम्प्लॉयी की पहुंच बढ़ जाएगी। आजकल सीईओ ब्लॉग लिखने लगे हैं। इससे उनके विचारों तक सभी कर्मचारियों की पहुंच रहती है। बदले में कर्मचारी भी अपने सुझाव देकर कंपनी पॉलिसी पर असर डाल सकते हैं।
तंदरुस्ती का खास ख्याल
मुमकिन है कि कंपनियां वेलनैस प्रोग्राम सभी के लिए जरूरी बना दें। ऐसे में सभी एम्प्लॉयी को अपनी सेहत की नियमित देखभाल और जांच करनी होगी। इससे कंपनी की हेल्थकेयर कॉस्ट कम होगी। कुडि़यों का होगा जमाना
पुरुषों के बीच महिलाएं अब जगह बनाने लगी हैं। उम्मीद है, 2020 तक बहुत से पुरुष घर बैठकर बच्चों की देखभाल करना पसंद करने लगें और बीवियां ऑफिस में कामयाबी के शिखर चूमें। बहरहाल कुछ भी हो, ऐसा समय होगा बड़ा रोचक और ऑफिस में काम करना एक अलग अनुभव।

2 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत हद तक इस दिशा में जा ही चुके हैं. बढ़िया विचारा.

Gyandutt Pandey said...

वाह, एल्विन टॉफलर सी सोच वाली पोस्ट।