Sunday, September 14, 2008

ताकि फिर सूनी न हो किसी मां की गोद

'मेरा बेटा बीएमडब्ल्यू कार हादसे में मारा गया। उसका खून सड़क पर बहा। टीवी और समाचार-पत्रों में जब बम धमाकों में घायल होने वाले लोगों को लहूलुहान और तड़पते देखा तो मुझे अपने बेटे की याद ताजा हो आई। दिल ने यही फैसला लिया कि नहीं, अब वह किसी मां से उसका लाल जुदा नहीं होने देगी। इसलिए वह अपने पूरे कुनबे के साथ बम विस्फोट में घायल हुए लोगों की मदद के लिए रक्तदान करने आई हैं।' यह कहना था कि बुधवार की देर रात बीएमडब्ल्यू कार हादसे में घायल होने एवं इलाज के दौरान शनिवार को अस्पताल में दम तोड़ देने वाले गाजियाबाद निवासी युवक अनुज की मां उषा सिंह का। यह कहते हुए उसकी आंखों में बेटे की जुदाई के गम के साथ-साथ लोगों की मदद का एक अलग ही जज्बा दिख रहा था।
बम हादसे में घायल हुए लोगों की मदद करने के लिए रविवार की शाम अनुज आदित्य की मां उषा सिंह, बड़ा भाई क्षितिज, मामा राकेश चौहान व तेजेश चौहान, मामी अनिता, राजीव त्यागी समेत 15 लोग राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने हाथ में अनुज की फोटो ले रखी थी। उन्होंने इस मौके पर कहा कि उनके द्वारा किए गए रक्तदान से अन्य लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा और यही उनके बेटे को उनकी ओर से सही श्रद्धांजलि होगी।
वहीं, बम विस्फोट में घायल लोगों की मदद में राजधानी के राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों और साधारण लोगों का भी जज्बा देखने लायक था। हर कोई रक्तदान करने के लिए उतावला-सा था। हादसा होते ही सबसे पहले युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता, उसके बाद एनएसयूआई कार्यकर्ता और बाद में युवा परिवार सेवा समिति के लोग घायलों की मदद को रक्तदान करने पहुंचे। इसके अलावा अन्य जगहों से भी एक-एक करके लोग रक्तदान करने के लिए अस्पताल में शनिवार की देर रात से रविवार की देर रात तक पहुंचते रहे। कितने लोगों ने रक्तदान किया, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रविवार की देर शाम तक लोहिया अस्पताल में ब्लड बैंक का काटा भी फुल हो गया। अंत में अस्पताल प्रबंधन ने लोगों से रक्तदान करने से मना कर दिया। इस बारे में अस्पताल के सीएमओ डॉ. एसके शर्मा ने बताया कि उनके पास इस समय घायलों की मदद के लिए पर्याप्त मात्रा में खून की यूनिट मौजूद हैं। इसलिए लोगों के द्वारा किए जा रहे रक्तदान की अभी जरूरत नहीं है। उनके पास पहले से ही ब्लड बैंक में काफी अधिक रक्त है।

2 comments:

Udan Tashtari said...

सही कह रहे हैं.

रक्त दान- महा दान!

Gyandutt Pandey said...

ओह, यह जज्बा रक्त दान में!
दुख में ही मानव चरित्र की विराटता सामने आती है।